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हिमाचल: नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित हिमाचल एम्पोरियम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने हिमाचल में स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट उत्पादों को देखा और कुछ उत्पादों की खरीद भी की। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे भारत के बुनकरों और कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए कम से कम एक हैंडलूम उत्पाद जरूर खरीदें।
राज्यपाल ने कहा कि देश की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प केवल रोजगार का साधन नहीं हैं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। बुनकरों और कारीगरों ने अपनी मेहनत, हुनर और रचनात्मकता के माध्यम से पीढ़ियों से देश की परंपराओं और संस्कृति को जीवित रखा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
कविंदर गुप्ता ने नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर देशभर के बुनकरों, कारीगरों और हैंडलूम क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध संस्कृतियों, परंपराओं और कलाओं से बनी है और हैंडलूम इस विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बुनकर अपने पारंपरिक ज्ञान और कौशल के जरिए ऐसी वस्तुएं तैयार करते हैं, जिनमें स्थानीय संस्कृति और इतिहास की झलक दिखाई देती है।
खरीदारी कर दिया ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश
हिमाचल एम्पोरियम के दौरे के दौरान राज्यपाल ने स्थानीय कारीगरों और बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता और पारंपरिक डिजाइन की सराहना की। स्वयं हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद खरीदकर उन्होंने लोगों को स्थानीय उत्पादों को अपनाने का संदेश भी दिया।
उन्होंने कहा कि जब उपभोक्ता स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पाद खरीदता है तो उसका सीधा लाभ बुनकरों, कारीगरों और उनसे जुड़े परिवारों तक पहुंचता है। इससे पारंपरिक उद्योगों को मजबूती मिलती है और नई पीढ़ी भी इन व्यवसायों से जुड़ने के लिए प्रेरित होती है।
राज्यपाल ने लोगों से अपील की कि वे त्योहारों, विशेष अवसरों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए स्थानीय एवं हैंडलूम उत्पादों को प्राथमिकता दें। उनका कहना था कि एक छोटा-सा खरीद निर्णय भी किसी कारीगर के परिवार की आजीविका को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
पीढ़ियों से संजो रहे सांस्कृतिक विरासत
कविंदर गुप्ता ने कहा कि भारत के बुनकरों और कारीगरों ने सदियों से अपने हुनर को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाया है। पारंपरिक बुनाई, कढ़ाई, ऊन और अन्य हस्तशिल्प से जुड़े कौशल देश की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। आधुनिक दौर में इन परंपराओं को बचाए रखना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर कारीगरों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बुनकरों की रचनात्मकता और मेहनत ने भारतीय हस्तशिल्प को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी पहचान दिलाई है। पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक बाजार से जोड़कर कारीगरों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
हिमाचली उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर
नई दिल्ली स्थित हिमाचल एम्पोरियम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद उपलब्ध होते हैं। राज्यपाल के दौरे के दौरान हिमाचली उत्पादों की विशेषताओं और उनकी बाजार क्षमता पर भी ध्यान दिया गया। हिमाचल की पारंपरिक कला में ऊनी उत्पाद, शॉल, टोपी, कढ़ाई और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुओं की विशेष पहचान है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल के कारीगरों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर मंच उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पर्यटन के साथ हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट को जोड़ने की भी व्यापक संभावनाएं हैं। हिमाचल आने वाले पर्यटक यदि स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद खरीदते हैं तो इससे प्रदेश के कारीगरों को सीधे आर्थिक लाभ मिल सकता है। साथ ही, पर्यटकों के माध्यम से हिमाचल की पारंपरिक कला देश के अन्य हिस्सों तक भी पहुंच सकती है।
युवाओं को जोड़ने की जरूरत
राज्यपाल ने पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पीढ़ी से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक और आधुनिक डिजाइन के इस्तेमाल से हैंडलूम क्षेत्र को नई दिशा दी जा सकती है। युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें डिजाइन, मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और आधुनिक उत्पादन तकनीकों से जोड़ा जाए तो पारंपरिक कारीगरी के लिए नए बाजार तैयार हो सकते हैं।
हैंडलूम क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। ऑनलाइन माध्यमों से कारीगर अपने उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों के ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और कारीगरों को बेहतर मूल्य दिलाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
आत्मनिर्भर भारत से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र
राज्यपाल ने हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट क्षेत्र को आत्मनिर्भर भारत की भावना से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। यह क्षेत्र बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे कारीगरों, ग्रामीण परिवारों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। लोगों को अपने व्यवहार और खरीदारी की आदतों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी। यदि देश के करोड़ों लोग नियमित रूप से स्थानीय और हैंडलूम उत्पाद खरीदेंगे तो इसका सीधा असर इस क्षेत्र से जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा।
नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर राज्यपाल का हिमाचल एम्पोरियम दौरा इसी संदेश को मजबूत करने वाला रहा कि देश की पारंपरिक कारीगरी को संरक्षित करने के साथ उसे आधुनिक बाजार से जोड़ना भी जरूरी है। बुनकरों और कारीगरों के हुनर को सम्मान और बाजार दोनों मिले तो भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंचाई जा सकती है।





