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Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में तापमान बढ़ने के साथ ही जंगलों में आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। राज्यभर में इस साल मई महीने के दौरान अब तक 148 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन घटनाओं में सबसे अधिक मामले मंडी जिले में सामने आए हैं, जहां जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। विभाग आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन कई इलाकों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौती बनी हुई है।
राजधानी शिमला में हालांकि आगजनी की केवल चार घटनाएं दर्ज की गई हैं, लेकिन इन घटनाओं में नुकसान का स्तर काफी अधिक रहा है। शिमला में ही लगभग 1544.36 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आकर प्रभावित हुआ है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
अधिकारियों के अनुसार, जंगलों में आग लगने से न केवल पेड़-पौधों और वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचता है, बल्कि वहां रहने वाले वन्य जीव-जंतुओं के जीवन पर भी गंभीर असर पड़ता है। कई बार आग के कारण जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ जाता है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि गर्मी के मौसम में जंगलों के आसपास सावधानी बरतें और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना प्रशासन को दें। विभाग का कहना है कि अधिकांश वनाग्नि की घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण भी होती हैं।
स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और फायर वॉच टीमों को सक्रिय किया गया है। साथ ही स्थानीय लोगों की मदद से आग पर नियंत्रण पाने की कोशिशें की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन घटनाओं पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में वन क्षेत्र को और अधिक नुकसान हो सकता है। राज्य सरकार और वन विभाग अब स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और रोकथाम के उपायों को मजबूत किया जा रहा है।





