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शिमला लैंडस्लाइड पर NHAI का जवाब, ‘एक्ट ऑफ गॉड’ बताते हुए मुआवजे से इनकार

Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को बताया है कि मई 2025 में शिमला में हुआ भूस्खलन “एक्ट ऑफ गॉड” था और इसके लिए संस्था को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर NHAI ने प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से भी इनकार किया है।
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जो कुछ जमीन मालिकों ने जनवरी में दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि NHAI और उसके कंसेशनधारकों द्वारा ढलानों को पर्याप्त रूप से मजबूत किए बिना चल रहे भारी निर्माण कार्यों के कारण शिमला ग्रामीण तहसील में कृषि भूमि को नुकसान हुआ, जिसके बाद भूस्खलन की स्थिति बनी।
याचिका में कहा गया है कि शकराल गांव से ढली तक (NH-5 के कैथलीघाट-ढल्ली सेक्शन) चल रहे फोर-लेन चौड़ीकरण परियोजना के दौरान पर्यावरणीय नियमों और ढलान स्थिरीकरण मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे प्राकृतिक असंतुलन पैदा हुआ।
इसके जवाब में NHAI ने NGT के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह घटना प्राकृतिक आपदा थी और इसे मानव हस्तक्षेप से जोड़ना उचित नहीं है। संस्था का कहना है कि भारी वर्षा और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह भूस्खलन हुआ, जिसे रोका जाना संभव नहीं था।
इस मामले पर सुनवाई के दौरान NGT ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी और यह स्पष्ट करने को कहा था कि परियोजना के दौरान पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन किया गया था या नहीं।
किसान पक्ष का कहना है कि यदि निर्माण कार्य वैज्ञानिक तरीके से और नियमों के अनुसार किया गया होता, तो इतनी बड़ी क्षति नहीं होती। वहीं NHAI का तर्क है कि सड़क परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है और इसमें सभी आवश्यक मानकों का पालन किया गया है।
फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और NGT द्वारा सभी पक्षों की दलीलों और तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। मामले को लेकर स्थानीय प्रभावित क्षेत्रों में चिंता बनी हुई है, क्योंकि कई किसानों की कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है और मुआवजे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।





