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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई क्षेत्रों में भूस्खलन और आपदा का खतरा बढ़ गया है। कांगड़ा जिले के जवाली उपमंडल की नियांगल पंचायत में जमोला पहाड़ी के लगातार दरकने से पूरा गांव खतरे की जद में आ गया है। पहाड़ी से लगातार गिर रहे मलबे और पत्थरों के कारण ग्रामीणों में डर का माहौल है। लोगों को आशंका है कि अगर समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो कभी भी बड़ी तबाही हो सकती है।
नियांगल पंचायत के मियोली क्षेत्र में जमोला पहाड़ी पिछले कई दिनों से लगातार खिसक रही है। बारिश के कारण पहाड़ी कमजोर हो गई है और वहां से मिट्टी, पत्थर और पेड़ों का मलबा नीचे आ रहा है। इससे गांव के कई घर और पशुशालाएं प्रभावित हुई हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि ग्रामीणों को हर बारिश के दौरान अपनी जान बचाने की चिंता सताने लगी है।
ग्रामीणों के अनुसार, पहाड़ी से आए मलबे की चपेट में आने से सागर सिंह की गौशाला और प्यारू राम का स्लेटपोश मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके अलावा करीब 15 कनाल उपजाऊ कृषि भूमि भी बर्बाद हो गई है। खेतों में खड़ी मक्की और धान की फसल मलबे और पानी के बहाव में खराब हो गई। दो दिन पहले जमोला पहाड़ी से आए फ्लैश फ्लड ने क्षेत्र में काफी नुकसान पहुंचाया था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गांव के करीब 15 मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। इनमें से छह घर ऐसे हैं जो कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जबकि नौ अन्य मकान भी खतरे की सीमा में आ गए हैं। मलबे में कीचड़, पत्थर, रेत और पेड़-पौधे शामिल हैं, जो घरों और पशुशालाओं तक पहुंच चुके हैं। कई परिवारों को अपनी सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा।
प्रशासन की ओर से फिलहाल राहत और बचाव कार्य शुरू किए गए हैं। स्थानीय पटवारी के माध्यम से स्थिति का जायजा लिया गया और जेसीबी मशीन लगाकर नाले को अस्थायी रूप से गहरा किया गया, ताकि पानी का बहाव नियंत्रित किया जा सके। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है। अगर बारिश जारी रही तो दोबारा वही स्थिति पैदा हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। वर्ष 2023 से जमोला घाटी में पहाड़ी खिसकने का सिलसिला जारी है। हर बरसात में लोग डर के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पहाड़ी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार कराने की मांग की, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
नवनिर्वाचित वार्ड सदस्य मदन लाल ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों से गरीब परिवार हर बारिश में खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक, कृषि मंत्री, जिलाधिकारी कांगड़ा और एसडीएम जवाली को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल अस्थायी राहत ही मिल सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार बारिश के बाद कुछ समय के लिए मलबा हटाया जाता है, लेकिन पहाड़ी की समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय पंचायत उपप्रधान डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि नाले को गहरा करने से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन खतरा अभी भी खत्म नहीं हुआ है। प्रभावित परिवारों ने सरकार से मांग की है कि पहाड़ी का स्थायी उपचार कराया जाए और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाए।
वहीं, एसडीएम जवाली नरेंद्र जरियाल ने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी राहत उपलब्ध कराई जा रही है। यदि हालात बिगड़ते हैं तो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है और आगे की कार्रवाई स्थिति के अनुसार की जाएगी।





