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हिमाचल प्रदेश
शिमला में SIR के खिलाफ माकपा का प्रदर्शन चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
Ratna Netam
8 Oct 2026 6:24 PM IST

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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। INDIA गठबंधन और वामपंथी दलों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के आह्वान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर भी नाराजगी जताई। इस दौरान सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जा रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
गुरुवार को आयोजित प्रदर्शन में माकपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए।कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने दिल्ली में विपक्षी सांसदों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना लोकतांत्रिक अधिकार है और राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर सवाल उठाने का अवसर मिलना चाहिए।
चुनाव आयोग पर विजेंद्र मेहरा ने लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना आवश्यक है।मेहरा ने दावा किया कि चुनाव आयोग के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मेहरा ने कहा कि शिमला में आयोजित प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ चल रहे व्यापक आंदोलन का हिस्सा है।उन्होंने कहा कि विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।हालांकि, चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं की सही जानकारी सुनिश्चित करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।
SIR प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग
माकपा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका बनी हुई है।वामपंथी दलों की मांग है कि एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए पात्र लोगों के नाम दोबारा शामिल किए जाएं।इससे पहले 30 सितंबर को भी माकपा और अन्य वामपंथी दलों ने शिमला में प्रदर्शन किया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, एसआईआर प्रक्रिया रोकने और चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की थी।उस प्रदर्शन में माकपा के प्रदेश सचिव संजय चौहान, विजेंद्र मेहरा और अन्य वामपंथी नेताओं ने भाग लिया था।
दिल्ली में विपक्षी नेताओं की हिरासत का विरोध
शिमला में गुरुवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा नई दिल्ली में विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया जाना भी रहा।दरअसल, 6 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया था।इस प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल थे।दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था। इसके बाद विपक्षी नेता धरने पर बैठ गए और पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया।विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई की आलोचना की और इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया।
संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
विजेंद्र मेहरा ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज में बढ़ते हस्तक्षेप के खिलाफ लगातार आंदोलन किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह विरोध केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है।माकपा नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह के संशोधन के दौरान सभी पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसी संस्थाओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए।
देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दलों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहा। दिल्ली के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए गए।कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को 'काला दिवस' मनाने का आह्वान किया था। वहीं वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपना विरोध जारी रखा।शिमला में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की हिरासत के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस और वामपंथी दलों के अलग-अलग कार्यक्रमों में चुनाव आयोग तथा प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से संबंधित मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
माकपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी राय रखने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार प्राप्त है।प्रदर्शनकारियों के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और जनता का विश्वास सुरक्षित रखना आवश्यक है।वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान संवैधानिक अधिकारों के साथ लागू कानूनी प्रावधानों का पालन भी आवश्यक होता है।शिमला में हुए प्रदर्शन के दौरान माकपा ने चुनाव आयोग से संबंधित अपनी मांगों को दोहराया और एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया।
चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की बात
वामपंथी दल पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध दर्ज करा चुके हैं। माकपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और एसआईआर प्रक्रिया रोकने की मांग करते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही है।गुरुवार के प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा ने इसी मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान जरूरी है।फिलहाल एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दल जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग और भाजपा ने पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है।शिमला में माकपा का प्रदर्शन इसी देशव्यापी राजनीतिक विवाद का हिस्सा रहा। इस दौरान विपक्षी नेताओं की हिरासत का विरोध करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को तत्काल रोकने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
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