हिमाचल प्रदेश

मैनुअल फिटनेस टेस्टिंग पर विवाद, Himachal ने केंद्र से अनुमति मांगी

Ratna Netam
12 April 2026 2:32 PM IST
मैनुअल फिटनेस टेस्टिंग पर विवाद, Himachal ने केंद्र से अनुमति मांगी
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: वाहन फिटनेस जांच प्रणाली में प्रस्तावित बदलावों को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच Himachal Pradesh सरकार ने मैनुअल वाहन फिटनेस टेस्टिंग को जारी रखने के लिए केंद्र सरकार से औपचारिक मंज़ूरी मांगी है। राज्य सरकार ने यह कदम तब उठाया है जब केंद्र द्वारा ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में नीति सख्त की जा रही है।
राज्य के परिवहन विभाग ने तर्क दिया है कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियाँ, पहाड़ी सड़कें और सीमित तकनीकी ढांचा अभी पूरी तरह से स्वचालित फिटनेस केंद्रों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। ऐसे में मैनुअल टेस्टिंग प्रणाली को तुरंत समाप्त करना व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है और इससे वाहन मालिकों, विशेषकर छोटे ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि जब तक पूरे राज्य में पर्याप्त संख्या में ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो जाते, तब तक मैनुअल प्रणाली को जारी रखना आवश्यक है। सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि संक्रमण काल (transition period) के दौरान दोनों प्रणालियाँ साथ-साथ चलाई जाएँ।
यह मामला तब और चर्चा में आया जब Ministry of Road Transport and Highways, India ने देशभर में वाहन फिटनेस जांच को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की नीति पर जोर दिया। केंद्र का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, भ्रष्टाचार कम करना और सड़क सुरक्षा मानकों को मजबूत करना बताया गया है।
हालांकि, कई राज्यों ने इस बदलाव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऑटोमेटेड सिस्टम की स्थापना में भारी निवेश की जरूरत होती है और इसके संचालन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता भी आवश्यक है, जो फिलहाल सभी क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं है। खासकर पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रक्रिया और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
हिमाचल सरकार ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि राज्य में कई छोटे परिवहन व्यवसायी पुराने वाहनों पर निर्भर हैं और अचानक बदलाव से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मैनुअल फिटनेस टेस्टिंग को तत्काल बंद करना व्यावहारिक नहीं होगा।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मैनुअल परीक्षण प्रणाली में अनुभवी तकनीशियन वाहनों की जांच करते हैं, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, ऑटोमेटेड सिस्टम पूरी तरह मशीन आधारित होता है, जो कुछ परिस्थितियों में सीमित हो सकता है, खासकर ऊँचाई और खराब सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए।
इस मुद्दे पर राज्य और केंद्र के बीच बातचीत जारी है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में केंद्र सरकार राज्यों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोई लचीली नीति या समय-सीमा विस्तार दे सकती है।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सड़क सुरक्षा सुधार के लिए ऑटोमेशन एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसे लागू करने के लिए क्षेत्रीय विविधताओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। यदि नीति में संतुलन नहीं रखा गया, तो इसका असर छोटे वाहन चालकों और स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल, Himachal Pradesh सरकार की ओर से केंद्र से अनुमति की प्रतीक्षा की जा रही है। इस बीच राज्य में मैनुअल फिटनेस टेस्टिंग जारी रखने की संभावना बनी हुई है, जिससे वाहन मालिकों को अस्थायी राहत मिल सकती है।
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