हिमाचल प्रदेश

कानून पर कोई समझौता नहीं: Shanta Kumar

Payal
12 April 2026 1:39 PM IST
कानून पर कोई समझौता नहीं: Shanta Kumar
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: पूर्व मुख्यमंत्री Shanta Kumar ने स्थानीय परंपराओं, पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक जीवनशैली के लिए जाना जाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि विकास की प्रक्रिया में इन मूल्यों को संरक्षित रखा जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय परंपराएं केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि समाज की पहचान और उसकी आत्मा होती हैं।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देते हुए कहा कि पहाड़ी राज्यों में प्राकृतिक संतुलन बेहद संवेदनशील होता है। अनियंत्रित निर्माण, वनों की कटाई और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकती है। इसलिए विकास कार्यों को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।
Himachal Pradesh में हाल के वर्षों में पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के चलते तेजी से बदलाव देखे गए हैं। इस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन यह टिकाऊ और संतुलित होना चाहिए। यदि विकास प्रकृति और संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है, तो वह दीर्घकालिक रूप से राज्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
शांता कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज में कानून का सम्मान ही व्यवस्था और शांति की नींव होता है। इसलिए सभी नागरिकों और संस्थानों को नियमों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और आधुनिकता को अपनाते समय अपनी परंपराओं को न भूलें। उनके अनुसार, शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज में संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। खासकर ऐसे समय में जब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कुल मिलाकर, शांता कुमार का यह बयान इस बात पर जोर देता है कि हिमाचल का विकास तभी सार्थक होगा जब वह अपनी परंपराओं, पर्यावरण और कानून के प्रति पूर्ण सम्मान बनाए रखेगा।
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