- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- SIR पर कांग्रेस के...
हिमाचल प्रदेश
SIR पर कांग्रेस के विरोध को लेकर बीजेपी ने उठाए सवाल
Ratna Netam
8 Oct 2026 6:20 PM IST

x
शिमला। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में जारी राजनीतिक विवाद के बीच हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बीजेपी विधायक और प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद दोहराए गए नामों, फर्जी प्रविष्टियों और अन्य अनियमितताओं को दूर करना है। शर्मा ने कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी ने पहले कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाया था, वही अब मतदाता सूची को सही करने की प्रक्रिया का विरोध कर रही है।
शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान रणधीर शर्मा ने कहा कि देश में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पहली बार नहीं अपनाई जा रही है। इससे पहले भी चुनाव आयोग विभिन्न अवसरों पर मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण कर चुका है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना आवश्यक है।बीजेपी नेता ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को दूर करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कांग्रेस इस प्रक्रिया का राजनीतिक विरोध कर रही है। उनके अनुसार, मतदाता सूची में यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है या कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल है, तो ऐसी प्रविष्टियों की पहचान करना आवश्यक है।
रणधीर शर्मा ने सवाल किया कि कांग्रेस लगातार वोट चोरी के आरोप लगाती रही है, लेकिन जब चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया अपना रहा है, तो पार्टी उसका विरोध क्यों कर रही है। उन्होंने कांग्रेस के इस रुख को विरोधाभासी बताया।शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और इस प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
हालांकि, कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को असंवैधानिक बताना रणधीर शर्मा का राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण है। किसी प्रशासनिक या चुनावी प्रक्रिया का शांतिपूर्ण विरोध करना अपने आप में असंवैधानिक नहीं होता। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता प्राप्त है, हालांकि इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति उसमें शामिल न हो। आयोग ने इस प्रक्रिया के लिए संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया है।
चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश में भी स्पष्ट किया गया था कि इससे पहले विभिन्न वर्षों में मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण किया गया है। आयोग ने 1952 से 1956, 1957, 1961, 1965, 1966 और बाद के कई वर्षों में ऐसी प्रक्रियाओं का उल्लेख किया था।रणधीर शर्मा ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर ईवीएम और चुनावी व्यवस्था को स्वीकार करती है, लेकिन चुनाव हारने पर उन्हीं संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को भी इस विवाद में घेरा। शर्मा ने सवाल किया कि यदि कांग्रेस चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर संदेह कर रही है, तो मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह उसी चुनावी प्रक्रिया से बनी अपनी सरकार को किस नजरिए से देखते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।बीजेपी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी को ईवीएम और मतपत्र, दोनों माध्यमों से हुए चुनावों में जनता का समर्थन मिला है। उन्होंने कांग्रेस को चुनावी परिणामों पर लगातार सवाल उठाने के बजाय अपने राजनीतिक प्रदर्शन की समीक्षा करने की सलाह दी।
दूसरी ओर, कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के नेता विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।इसी मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दिल्ली में 6 अक्टूबर से विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन जारी है। मंगलवार को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। बुधवार को भी राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया।गुरुवार को लगातार तीसरे दिन विपक्षी सांसदों ने राजघाट पर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का कार्यक्रम बनाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई।
इस राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग और बीजेपी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पक्षपात तथा चुनावी गड़बड़ियों से संबंधित विपक्ष के आरोपों का खंडन किया है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि उसकी आपत्तियां पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने से जुड़ी हैं।मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के विवरण को सही करना होता है। इसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत व्यक्तियों या स्थान बदल चुके मतदाताओं की प्रविष्टियों की जांच करने और दोहराए गए नामों की पहचान जैसे कार्य शामिल हो सकते हैं।हालांकि, इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर मतदाता सूची में नाम की जांच, नया पंजीकरण और संबंधित दस्तावेज जमा करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कानूनी और संवैधानिक सवाल भी उठाए गए हैं। इस प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और मतदाताओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विभिन्न पक्ष अपनी आपत्तियां सामने रख रहे हैं। इसलिए चुनाव आयोग के अधिकारों और किसी विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के क्रियान्वयन को लेकर उठने वाले सवालों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।रणधीर शर्मा ने अपने बयान में कांग्रेस से चुनाव आयोग की प्रक्रिया का विरोध करने के बजाय मतदाता सूची को सही बनाने के प्रयासों में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
फिलहाल SIR को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। कांग्रेस जहां मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठा रही है, वहीं बीजेपी इस प्रक्रिया को चुनावी व्यवस्था की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बता रही है।गुरुवार को रणधीर शर्मा के बयान ने हिमाचल प्रदेश में भी इस राष्ट्रीय राजनीतिक विवाद को चर्चा का विषय बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को असंवैधानिक बताते हुए पार्टी के रुख पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, विपक्ष अपनी आपत्तियों को लेकर विरोध जारी रखे हुए है। ऐसे में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया, उससे जुड़ी शिकायतों और उनके समाधान पर राजनीतिक तथा कानूनी बहस जारी है।
Next Story





