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हिमाचल प्रदेश
दूध उत्पादकों को बड़ी राहत, सरकार ने तय किया 14 करोड़ का बजट
Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 6:36 PM IST

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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के हजारों दूध उत्पादकों और पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए दूध प्रोत्साहन राशि दोगुनी करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों को दूध बेचने वाले पात्र पशुपालकों के लिए प्रोत्साहन राशि तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर कर दी है। सरकार के इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़े परिवारों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। संशोधित योजना के तहत पात्र दूध उत्पादकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके लिए सरकार ने 14 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
प्रदेश सरकार के अनुसार, दूध प्रोत्साहन योजना में बढ़ोतरी का निर्णय राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार खेती के साथ पशुपालन का व्यवसाय करते हैं। इन परिवारों के लिए दूध की बिक्री नियमित आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली अतिरिक्त आर्थिक सहायता उनके लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि डेयरी व्यवसाय को आजीविका का स्थायी और लाभकारी साधन बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छोटे और सीमांत किसानों को कृषि के साथ अन्य व्यवसायों से भी नियमित आय प्राप्त हो।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित योजना के तहत पात्र गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों को दूध की आपूर्ति करने वाले उत्पादकों को छह रुपये प्रति लीटर की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों तक आर्थिक सहायता सीधे पहुंचाने में मदद मिलेगी।
दरअसल, राज्य सरकार ने दूध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए पहले तीन रुपये प्रति लीटर की सहायता राशि देने की व्यवस्था शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य उन पशुपालकों को आर्थिक सहयोग प्रदान करना था, जो पंजीकृत गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से दूध की बिक्री करते हैं। लेकिन बढ़ती लागत और डेयरी व्यवसाय की आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने सहायता राशि बढ़ाने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने वर्ष 2026-27 के बजट में भी दूध प्रोत्साहन राशि को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर करने की घोषणा की थी। इसके बाद 10 अक्टूबर को मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब राज्य सरकार ने संशोधित योजना के माध्यम से पात्र उत्पादकों को अधिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि इस निर्णय से दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी सहकारी समितियों की भूमिका मजबूत होगी। विशेष रूप से उन इलाकों में जहां कृषि भूमि सीमित है और लोगों के पास आय के अन्य साधन कम हैं, वहां पशुपालन अतिरिक्त रोजगार का महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।
दूध प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी का आर्थिक लाभ समझें तो यदि कोई पात्र पशुपालक प्रतिदिन 10 लीटर दूध संबंधित सहकारी समिति को बेचता है, तो उसे पहले 30 रुपये प्रतिदिन की प्रोत्साहन राशि मिलती थी। अब उसी मात्रा पर उसे 60 रुपये मिलेंगे। इस प्रकार 30 दिनों में 300 लीटर पात्र दूध की आपूर्ति करने पर प्रोत्साहन राशि 900 रुपये से बढ़कर 1,800 रुपये हो जाएगी। यानी किसान को पहले की तुलना में 900 रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं।
इसी तरह यदि कोई पशुपालक प्रतिदिन 20 लीटर दूध की आपूर्ति करता है, तो उसे प्रोत्साहन के रूप में पहले 60 रुपये मिलते थे। नई व्यवस्था के तहत यह राशि बढ़कर 120 रुपये प्रतिदिन हो जाएगी। हालांकि वास्तविक भुगतान दूध की पात्र मात्रा, निर्धारित गुणवत्ता मानकों और योजना की शर्तों के अनुसार किया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि दूध उत्पादकों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने के साथ-साथ दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए सहकारी संस्थाओं के माध्यम से डेयरी गतिविधियों का विस्तार करने और दूध उत्पादकों को अधिक व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
पशुपालन विभाग की योजना के अनुसार, निर्धारित न्यूनतम गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले दूध पर ही प्रोत्साहन राशि देय होती है। पात्र सहकारी समितियां दूध की खरीद और संबंधित उत्पादकों का विवरण उपलब्ध कराती हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लाभार्थियों के खातों में भुगतान किया जाता है। इस व्यवस्था से पात्र किसानों को उनकी दूध आपूर्ति का रिकॉर्ड और प्रोत्साहन भुगतान की जानकारी उपलब्ध कराने में भी सुविधा होती है।
राज्य सरकार ने डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं। मंत्रिमंडल ने सरकारी विभागों को अपनी आवश्यकता का दूध और दुग्ध उत्पाद हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड से खरीदने के निर्देश देने को भी मंजूरी दी है। इस कदम से दुग्ध उत्पादों के लिए संस्थागत मांग बढ़ने और सहकारी डेयरी व्यवस्था को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसके लिए पशुपालन और कृषि से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनका कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किसानों को उनकी मेहनत का उचित आर्थिक लाभ मिलना आवश्यक है।
सरकार के अनुसार, डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के साथ दुग्ध उत्पादकों को बाजार से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है। दूध संग्रहण केंद्रों, प्रसंस्करण सुविधाओं और विपणन व्यवस्था में सुधार से पशुपालकों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिल सकती है।
फिलहाल प्रदेश सरकार के इस निर्णय से गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े पात्र दूध उत्पादकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रोत्साहन राशि दोगुनी होने से पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ सकती है। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहायता के माध्यम से दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करना, ग्रामीण रोजगार के अवसरों को मजबूत बनाना और डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाना है।
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