
Haryana हरियाणा: दिल्ली से चंडीगढ़ जा रही नेताजी एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब लगभग छह माह का एक मासूम बच्चा लावारिस हालत में मिला। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बच्चे को ट्रेन की सीट पर छोड़कर फरार होने की घटना सामने आई है। इस मामले ने यात्रियों को भी हैरान कर दिया और ट्रेन में कुछ देर के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई।
जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय सामने आई जब ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग पर चल रही थी और स्लीपर कोच में यात्रियों ने एक छोटे बच्चे के लगातार रोने की आवाज सुनी। पहले तो यात्रियों ने आसपास ध्यान नहीं दिया, लेकिन रोने की आवाज लगातार आने पर जब उन्होंने ध्यान दिया तो पाया कि एक लगभग छह माह का मासूम बच्चा सीट पर अकेला पड़ा हुआ है।
बच्चे को अकेला देखकर यात्रियों ने आसपास मौजूद अन्य यात्रियों से उसके माता-पिता के बारे में पूछताछ की, लेकिन काफी देर तक कोई भी अभिभावक सामने नहीं आया। इसके बाद यात्रियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत रेलवे पुलिस (जीआरपी) को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पानीपत रेलवे स्टेशन पर तैनात जीआरपी थाना पुलिस सक्रिय हो गई। जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, जीआरपी की टीम तुरंत स्लीपर कोच में पहुंची और बच्चे को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने मासूम को सुरक्षित बाहर निकालकर तुरंत नजदीकी सिविल अस्पताल में उपचार और जांच के लिए भेज दिया।
डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद बच्चे को सुरक्षित बताया है और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि बच्चे को आवश्यक देखभाल और सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
घटना के बाद रेलवे पुलिस ने स्लीपर कोच की गहन जांच की। इस दौरान पुलिस को सीट के पास से एक बैग मिला, जिसमें बच्चे के कपड़े, दूध और अन्य आवश्यक सामान रखा हुआ था। यह बैग इस बात का संकेत देता है कि बच्चे को पहले से तैयार कर यात्रा के दौरान लाया गया था।
इसके अलावा, पुलिस को मौके से एक रेल टिकट भी मिला है, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। जीआरपी अधिकारियों का कहना है कि टिकट की जानकारी से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चा किस स्टेशन से ट्रेन में सवार हुआ था और उसे किसने छोड़ा।
रेलवे पुलिस इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि उस व्यक्ति की पहचान की जा सके जिसने बच्चे को ट्रेन में छोड़ा। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह मामला किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा है या फिर किसी अन्य परिस्थिति का परिणाम है।
यात्रियों ने बताया कि मासूम के रोने की आवाज ने सबसे पहले उनका ध्यान खींचा। जब उन्होंने देखा कि बच्चा अकेला है और आसपास कोई नहीं है, तो वे तुरंत चिंतित हो गए। यात्रियों ने कहा कि उन्होंने कई बार आसपास के डिब्बों में भी जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
इस घटना के बाद ट्रेन में मौजूद यात्रियों के बीच भी चिंता का माहौल रहा। हालांकि जीआरपी के समय पर पहुंचने से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी रेलवे पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और दोषी व्यक्ति को जल्द ही पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस मामले में सहयोग की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के परिजनों का पता लगाना प्राथमिकता है ताकि उसे सुरक्षित उनके सुपुर्द किया जा सके या फिर उचित बाल संरक्षण प्रक्रिया अपनाई जा सके।
फिलहाल, मासूम बच्चा अस्पताल में सुरक्षित है और डॉक्टरों की निगरानी में है। पुलिस उसकी पहचान और उसके माता-पिता तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
यह घटना एक बार फिर रेलवे यात्रा के दौरान लापरवाही और मानवीय संवेदनशीलता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। साथ ही यह भी दर्शाती है कि समय पर यात्रियों और रेलवे स्टाफ की सतर्कता से किसी मासूम की जान बचाई जा सकती है।





