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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्ती

Kavita2
9 Aug 2026 10:44 AM IST
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्ती
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चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना यानी PM POSHAN के तहत दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य के एलिमेंट्री एजुकेशन डायरेक्टरेट ने स्कूलों में पहुंच रही खाद्य सामग्री और तैयार भोजन की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग का यह कदम उन शिकायतों और चिंताओं के बीच सामने आया है, जिनमें स्कूलों में बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता लगातार खराब होने की बात कही गई है।

PM POSHAN योजना का उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में पोषण का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। ऐसे में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कमी सीधे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर असर डाल सकती है।

HAIC के साथ एक साल का अनुबंध

जानकारी के अनुसार, हरियाणा शिक्षा विभाग ने नवंबर से खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिए हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (HAIC) के साथ एक साल का अनुबंध किया है। इस व्यवस्था के तहत सरकारी स्कूलों में PM POSHAN योजना के लिए आवश्यक विभिन्न खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जानी है।

अनुबंध में चना, सोया, राजमा, बेसन, रागी का आटा, गुड़, विभिन्न प्रकार की दालें, खाद्य तेल, मूंगफली और मसाले जैसी सामग्री शामिल हैं। इन वस्तुओं का इस्तेमाल स्कूलों में बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन में किया जाता है।

सरकार की ओर से खाद्य सामग्री की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का उद्देश्य यह है कि स्कूलों में भोजन तैयार करने के लिए आवश्यक सामान समय पर उपलब्ध हो और बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन दिया जा सके।

गुणवत्ता में कमी को लेकर चिंता

शिक्षा विभाग के सामने मुख्य चिंता खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर है। PM POSHAN के तहत इस्तेमाल होने वाली सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। यदि सामग्री खराब, बासी या मानकों से कम गुणवत्ता वाली पाई जाती है तो इसका असर तैयार भोजन की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

विभाग ने इसी कारण स्कूल स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा जा सकता है कि स्कूलों में पहुंचने वाली सामग्री की स्थिति की नियमित जांच हो और किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

बच्चों के पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना

PM POSHAN देश की प्रमुख स्कूली पोषण योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और शैक्षणिक गतिविधियों में सहायता करना है। नियमित भोजन मिलने से बच्चों की स्कूल में उपस्थिति और पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है।

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में भी बड़ी संख्या में बच्चे इस योजना से लाभान्वित होते हैं। ऐसे में योजना के तहत दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बनाए रखना शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के भोजन में इस्तेमाल होने वाली दाल, अनाज, तेल, गुड़, मूंगफली और अन्य सामग्री की गुणवत्ता में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। खास तौर पर छोटे बच्चों के लिए भोजन की स्वच्छता और पोषण मूल्य पर ध्यान देना जरूरी है।

स्कूल स्तर पर निगरानी महत्वपूर्ण

खाद्य सामग्री की आपूर्ति के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच केवल आपूर्तिकर्ता स्तर पर ही नहीं, बल्कि स्कूल स्तर पर भी जरूरी है। स्कूल प्रशासन को यह देखना होता है कि प्राप्त सामग्री निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता के अनुरूप है या नहीं।

यदि किसी सामग्री में खराबी, नमी, फफूंद, असामान्य गंध या अन्य समस्या दिखाई देती है तो उसे भोजन बनाने में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर सामग्री बदलने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।

इसी तरह भोजन तैयार होने के बाद भी उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित तरीके से वितरण पर ध्यान देना जरूरी है।

सप्लाई व्यवस्था पर भी नजर

HAIC के साथ एक साल का अनुबंध होने के बाद अब खाद्य सामग्री की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सामग्री समय पर स्कूलों तक पहुंचे और किसी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित न हो।

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्थित स्कूलों के लिए नियमित आपूर्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सामग्री की कमी होने पर निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन तैयार करने में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा सामग्री की गुणवत्ता में किसी तरह की शिकायत मिलने पर उसकी जांच और समाधान की प्रक्रिया भी तेज होनी चाहिए।

शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत

PM POSHAN जैसी योजना में बच्चों की सेहत सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। इसलिए खाद्य सामग्री या तैयार भोजन को लेकर सामने आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

यदि किसी स्कूल में खराब गुणवत्ता की सामग्री मिलती है तो संबंधित अधिकारियों को उसका नमूना लेकर जांच कराने और आपूर्ति की प्रक्रिया की समीक्षा करने की जरूरत होगी। दोष पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने के साथ आवश्यक कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

शिक्षा विभाग का सख्त रुख

हरियाणा एलिमेंट्री एजुकेशन डायरेक्टरेट का सख्त रुख इस बात का संकेत है कि सरकार स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहती। खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिए HAIC के साथ किए गए अनुबंध के बावजूद वास्तविक चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों तक पहुंचने वाली सामग्री और उससे तैयार भोजन दोनों निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।

आने वाले समय में खाद्य सामग्री की नियमित जांच, स्कूल स्तर पर निगरानी और शिकायतों के त्वरित निपटारे पर विशेष ध्यान देना होगा। इससे PM POSHAN योजना के तहत बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का उद्देश्य बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।

बच्चों को मिलने वाला भोजन केवल एक सरकारी सुविधा नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण पोषण कार्यक्रम है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता बनाए रखना शिक्षा विभाग, स्कूल प्रशासन और आपूर्ति एजेंसियों की साझा जिम्मेदारी होगी।

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