
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य सिविल सेवाओं में अनुसूचित जाति (SC) कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले में बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने ग्रुप-A और ग्रुप-B पदों पर अनुसूचित जाति कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दायर अपील पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
मानव संसाधन विभाग (एचआर विभाग) ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत 19 दिसंबर 2023 को जारी किए गए पहले के आदेशों को संशोधित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रमोशन में आरक्षण को लेकर आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्णय के आधार पर की जाएगी।
राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सरकारी सेवाओं में आरक्षण और पदोन्नति को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सामाजिक समूहों की ओर से इस मामले में अलग-अलग मांगें और तर्क रखे जाते रहे हैं।
सरकार के नए आदेश के अनुसार, ग्रुप-A और ग्रुप-B सेवाओं में अनुसूचित जाति कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखा जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय तक इस मामले में कोई नई कार्रवाई न की जाए।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने पहले प्रमोशन में आरक्षण लागू करने के संबंध में कदम उठाए थे। इसके बाद इस नीति को लेकर न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई और राज्य सरकार ने अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर की। अब सरकार ने अपने अगले कदम को अदालत के अंतिम फैसले से जोड़ दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक प्रशासनिक स्तर पर किसी भी विवाद से बचना है। सरकार चाहती है कि प्रमोशन प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों और लागू नियमों के अनुसार ही आगे बढ़े।
वहीं, इस फैसले के बाद कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रमोशन में आरक्षण सामाजिक समानता और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का एक माध्यम है, इसलिए इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, कुछ वर्गों का तर्क है कि प्रमोशन नीतियों में संवैधानिक प्रावधानों और न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन होना चाहिए।
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी सेवाओं में पदोन्नति से जुड़े आरक्षण के मामलों में राज्य सरकारों को कई संवैधानिक और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के फैसलों में भी समय-समय पर प्रमोशन में आरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
हरियाणा सरकार के नए आदेश से फिलहाल उन विभागों में असर पड़ेगा, जहां ग्रुप-A और ग्रुप-B पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है या प्रस्तावित है। अब इन पदों पर प्रमोशन से संबंधित फैसले हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद ही लिए जाएंगे।
मानव संसाधन विभाग ने सभी संबंधित विभागों को नए निर्देशों की जानकारी भेज दी है। अधिकारियों को कहा गया है कि वे प्रमोशन प्रक्रिया में इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।
राज्य सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि न्यायालय का फैसला आने के बाद उसी के अनुसार नीति में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। यदि अदालत सरकार के पक्ष में फैसला देती है तो प्रमोशन में आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, जबकि अलग निर्णय की स्थिति में सरकार को अपनी नीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
फिलहाल, हरियाणा में अनुसूचित जाति कर्मचारियों के प्रमोशन आरक्षण का मामला न्यायिक निर्णय पर निर्भर है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि राज्य में ग्रुप-A और ग्रुप-B पदों पर पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था किस रूप में लागू होगी।





