हरियाणा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में महर्षि कश्यप के जीवन दर्शन पर सेमिनार

Kiran
6 Oct 2026 11:30 AM IST
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में महर्षि कश्यप के जीवन दर्शन पर सेमिनार
x
Kurukshetra University कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत-पालि-प्राकृत विभाग एवं महर्षि कश्यप पीठ ने संयुक्त रूप से सोमवार को सीनेट हॉल में "महर्षि कश्यप का जीवन दर्शन: विविध आयाम" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। मुख्य अतिथि हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि महर्षि कश्यप भारतीय ऋषि परंपरा के एक महान विचारक थे जिनके दर्शन ने ज्ञान, संयम और लोक कल्याण के मूल्यों को व्यक्त किया।
बेदी ने युवाओं से महर्षि कश्यप की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने महर्षि कश्यप पीठ के लिए आर्थिक सहायता का भी आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथि एवं इंद्री विधायक राम कुमार कश्यप ने कहा कि ऋषि-मुनियों की परंपरा भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। उन्होंने कश्यप समुदाय से महर्षि कश्यप के विचारों और शिक्षाओं के प्रसार के लिए विश्वविद्यालय के साथ काम करने का आह्वान किया।
सेमिनार के संरक्षक और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि महर्षि कश्यप भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने कहा कि महर्षि कश्यप का जीवन दर्शन ज्ञान और विवेकपूर्ण निर्णय लेने को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और शिक्षण पर उनके विचार एनईपी 2020 के दृष्टिकोण से भी मेल खाते हैं। मुख्य वक्ता, साहित्य अकादमी, पंचकुला के उपाध्यक्ष प्रोफेसर कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि महर्षि कश्यप वेदों के द्रष्टा और भजनों के संगीतकार थे। उन्होंने कहा कि पुराणों और इतिहास का समकालीन समाज के संदर्भ में अध्ययन कर उनके जीवन दर्शन को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
अग्निहोत्री ने महर्षि कश्यप के विचार 'वसुधैव कुटुंबकम' के आदर्श की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला। संस्कृत-पाली-प्राकृत विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर कृष्णा देवी ने संगोष्ठी का विषय और रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि रजिस्ट्रार लेफ्टिनेंट वीरेंद्र पाल ने कार्यक्रम का संचालन किया। जनसंपर्क उपनिदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा ने बताया कि सेमिनार के दौरान कुल 14 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये।
Next Story