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Panchkula पंचकूला (हरियाणा)। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि ‘सनातन धर्म’ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि एक ऐसी संस्कृति है जिसे हमारे पूर्वजों ने मानवता और जीवन के उत्थान के लिए रचा था। यह संस्कृति हर व्यक्ति को बेहतर बनने की प्रेरणा देती है और इसी के मूल में विश्व शांति और सर्वांगीण प्रगति का संदेश छिपा है। कटारिया बुधवार को पंचकूला में आयोजित एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया संघर्षों, हिंसा और तनाव से जूझ रही है, ऐसे समय में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी धरती एक परिवार है) का भाव मानवता को नई दिशा दे सकता है। यही सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है — जो सबको जोड़ती है, किसी को तोड़ती नहीं।
उन्होंने कहा कि सनातन जीवन पद्धति का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज का निर्माण है जहां हर व्यक्ति अपने भीतर सद्गुण, संयम और सेवा की भावना विकसित करे। कटारिया ने कहा, “हमारे ऋषि-मुनियों ने जो जीवन सिद्धांत दिए, वे किसी विशेष वर्ग या धर्म के लिए नहीं थे, बल्कि पूरे मानव समाज के कल्याण के लिए थे। सनातन संस्कृति में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का भाव है, जो हमें दूसरों के कल्याण में ही अपनी खुशी देखने की प्रेरणा देता है। राज्यपाल ने आगे कहा कि आज आवश्यकता है कि नयी पीढ़ी इस संस्कृति के मूल मूल्यों को समझे और उन्हें अपने जीवन में अपनाए। उन्होंने कहा कि अगर हर व्यक्ति खुद को सुधारने की दिशा में कदम उठाए तो समाज और दुनिया दोनों बेहतर बन सकते हैं। “जब हम अपने भीतर का सुधार शुरू करते हैं, तभी बाहर की दुनिया में सकारात्मक परिवर्तन आता है,” उन्होंने कहा।
कटारिया ने जोर देकर कहा कि भारत की ताकत उसकी संस्कृति और परंपरा में निहित है, जो हजारों वर्षों से विश्व को मार्गदर्शन देती आई है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता जहां भौतिक प्रगति पर केंद्रित है, वहीं भारतीय संस्कृति आध्यात्मिक और नैतिक उत्थान पर जोर देती है। यही कारण है कि भारत आज भी दुनिया को ‘विश्वगुरु’ बनने की राह दिखा सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं और युवाओं से उन्होंने अपील की कि वे सनातन मूल्यों — जैसे सत्य, करुणा, सहिष्णुता, और सेवा भाव — को अपने जीवन में उतारें और समाज में सौहार्द की भावना को बढ़ावा दें। राज्यपाल ने यह भी कहा कि अगर मानवता सनातन संस्कृति के सिद्धांतों को अपनाती है तो विश्व में शांति, सद्भाव और स्थायी विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने अंत में कहा, “सनातन कोई सीमित धर्म नहीं है, यह एक जीवन शैली है — जो हर इंसान को अपने कर्म, व्यवहार और विचार से श्रेष्ठ बनने की प्रेरणा देती है। यही वास्तविक धर्म है, यही भारत की आत्मा है।
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