
हांसी। ऑनलाइन ठगी के एक मामले में साइबर थाना हांसी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक किराना दुकानदार का मोबाइल नंबर हैक करने के बाद उसके बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड के जरिए अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर कुल 68,750 रुपये निकालने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी की रकम में से 30 हजार रुपये बरामद किए हैं।
पुलिस अब मामले में हुए बैंकिंग लेन-देन की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वारदात में आरोपी के साथ अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। मामले से जुड़े डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
मामले की शुरुआत थाना सदर क्षेत्र निवासी हितेश कुमार की शिकायत के बाद हुई थी। हितेश कुमार किराना की दुकान चलाता है। उसने पुलिस को बताया कि 14 अगस्त को वह किसी काम के सिलसिले में हांसी बाजार आया हुआ था। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसका मोबाइल नंबर हैक कर लिया।
बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड से निकाली रकम
शिकायत के मुताबिक मोबाइल नंबर हैक होने के बाद पीड़ित के बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किए गए। इन ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 68,750 रुपये निकाल लिए गए।
पीड़ित को जब खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली तो उसे अपने साथ साइबर ठगी होने का पता चला। इसके बाद उसने तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
ऑनलाइन ठगी के मामलों में रकम अलग-अलग खातों या माध्यमों से ट्रांसफर की जा सकती है। इसी वजह से पुलिस ने इस मामले में भी बैंकिंग लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
महाराष्ट्र निवासी आरोपी गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना हांसी पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस महाराष्ट्र निवासी आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी की पहचान और उसके निवास स्थान से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर ठगी की पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पीड़ित का मोबाइल नंबर किस तरीके से हैक किया गया और इसके बाद उसके बैंक खाते तथा क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कैसे किए गए।
ठगी की रकम में से 30 हजार बरामद
पुलिस की कार्रवाई में आरोपी के कब्जे से 30 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। यह रकम ठगी के पैसे का हिस्सा बताई गई है। पीड़ित से कुल 68,750 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी।
अब पुलिस बाकी रकम के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच में बैंक खातों के बीच हुए लेन-देन की कड़ी खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम निकालने या ट्रांसफर करने के लिए किन बैंक खातों अथवा अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच
पुलिस के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि इस ऑनलाइन ठगी में गिरफ्तार आरोपी अकेला शामिल था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे। इसी को देखते हुए आरोपी से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
साइबर अपराध के मामलों में बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी जांच में महत्वपूर्ण साबित होती है। हांसी पुलिस भी इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
14 अगस्त को हांसी बाजार आया था पीड़ित
पीड़ित हितेश कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि वह 14 अगस्त को किसी काम से हांसी बाजार आया था। इसी दौरान उसका मोबाइल नंबर कथित रूप से हैक कर लिया गया।
इसके बाद उसके बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन लेन-देन शुरू हो गया। अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 68,750 रुपये निकाल लिए गए।
रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद हितेश ने मामले को नजरअंदाज करने के बजाय राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामला साइबर पुलिस की जांच में पहुंचा।
बैंकिंग रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
आरोपी की गिरफ्तारी और 30 हजार रुपये की बरामदगी के बाद भी मामले की जांच समाप्त नहीं हुई है। पुलिस अब बैंकिंग रिकॉर्ड और लेन-देन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है।
इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पीड़ित के खाते से निकली रकम किस खाते में पहुंची और वहां से उसे आगे कहां भेजा गया। इसके अलावा आरोपी के संपर्क में रहे लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है।
साइबर ठगी में सतर्कता जरूरी
ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर ठगी के मामलों में सावधानी महत्वपूर्ण है। मोबाइल नंबर, बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड और कार्ड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखना जरूरी है।
किसी खाते या क्रेडिट कार्ड से बिना अनुमति रकम निकलने पर तुरंत बैंक को सूचना देने के साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
हांसी के इस मामले में पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस जांच आरोपी तक पहुंची। फिलहाल महाराष्ट्र निवासी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और उसके कब्जे से 30 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।
पुलिस अब 68,750 रुपये की ठगी से जुड़े पूरे बैंकिंग नेटवर्क और संभावित अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वारदात में और कितने लोग शामिल थे और ठगी की बाकी रकम कहां गई।





