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भगवंत मान के OSD पर भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच
Ratna Netam
5 Oct 2026 3:50 PM IST

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नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाले एक अहम घटनाक्रम में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। मामला मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों का है। हाई कोर्ट ने CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद सोमवार को भाजपा सांसद संबित पात्रा ने पंजाब की AAP सरकार पर हमला बोला। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पात्रा ने दावा किया कि हाई कोर्ट के फैसले ने उन चिंताओं की पुष्टि की है, जिन्हें भाजपा लंबे समय से पंजाब में भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर उठाती रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP नेतृत्व से आरोपों पर जवाब देने की मांग भी की।
संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हुई है और भ्रष्टाचार गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही है और अब हाई कोर्ट की ओर से CBI जांच का आदेश दिया जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि ये आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की सत्यता अब जांच के दायरे में है।
हाई कोर्ट का आदेश एडवोकेट निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका पर आया है। याचिका में कहा गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुमन से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग की थी, लेकिन राज्य पुलिस की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया गया।
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए CBI को जांच सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को भी निर्देश दिया है कि वे निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएं। CBI को जांच की प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट दो महीने के भीतर अदालत के सामने पेश करनी होगी।
मामले में ED की ओर से लगाए गए आरोप ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी दस्तावेजों तक कथित अनधिकृत पहुंच, हथियार लाइसेंस और अन्य सरकारी लाभ दिलाने जैसी गतिविधियों से जुड़े हैं। ED के अनुसार, नितिन गोहल नामक व्यक्ति कथित तौर पर सरकारी लाभ चाहने वाले लोगों और OSD घुमन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। ये सभी फिलहाल आरोप हैं और CBI जांच के बाद ही इनकी वास्तविकता तथा संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।
संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों का उल्लेख करते हुए AAP नेतृत्व से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल से सवाल किया कि सरकार से जुड़े लोगों पर लगे इन आरोपों पर उनका क्या जवाब है। पात्रा ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा और हाल की आपराधिक घटनाओं का जिक्र किया।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी पहले इन आरोपों को लेकर केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा चुकी है। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका का विरोध भी किया था और कहा था कि राज्य पुलिस मामले को देख रही है। अदालत ने हालांकि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत बताते हुए इसे CBI को सौंप दिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में भ्रष्टाचार के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब CBI की जांच पर निगाहें रहेंगी। जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि ED की ओर से सामने रखे गए आरोपों में कितना आधार है और क्या किसी सरकारी अधिकारी या निजी व्यक्ति ने पद, प्रभाव या संपर्क का इस्तेमाल करके अवैध लाभ पहुंचाने की कोशिश की थी।
फिलहाल हाई कोर्ट का आदेश आरोपों को न्यायिक रूप से साबित किया जाना नहीं है, बल्कि आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने का निर्देश है। इसलिए संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी या दोष का निर्धारण CBI जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। राजनीतिक स्तर पर हालांकि इस फैसले के बाद भाजपा ने AAP सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी CBI की जांच और अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट होगी।
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