
भिवानी। मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं इस दौरान कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण हेपेटाइटिस ए और ई संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका रहती है। यह बीमारी सीधे तौर पर लीवर को प्रभावित करती है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के पानी के साथ गंदगी और बैक्टीरिया जल स्रोतों में पहुंच सकते हैं। ऐसे में बिना साफ किए पानी पीने या संक्रमित भोजन खाने से हेपेटाइटिस ए और ई वायरस शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यह संक्रमण लीवर में सूजन पैदा करता है, जिससे शरीर की पाचन प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।
चिकित्सकों का कहना है कि हेपेटाइटिस को सामान्य भाषा में पीलिया भी कहा जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं, इसलिए कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लापरवाही बरतने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। कुछ मामलों में लीवर डैमेज, सिरोसिस और लीवर फेलियर जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। डॉक्टरों ने कहा कि स्वच्छता, सुरक्षित भोजन, शुद्ध पानी और समय पर टीकाकरण के जरिए हेपेटाइटिस से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
मानसून में क्यों बढ़ता है हेपेटाइटिस का खतरा?
बरसात के मौसम में जलभराव और गंदगी के कारण संक्रमण फैलाने वाले वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। दूषित पानी पीने, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ खाने और साफ-सफाई की कमी से हेपेटाइटिस ए और ई का संक्रमण फैल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क किनारे मिलने वाला खुला भोजन, कटे हुए फल और अस्वच्छ जगहों पर तैयार खाना संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं।
हेपेटाइटिस ए और ई मुख्य रूप से संक्रमित पानी और भोजन के माध्यम से फैलते हैं। वहीं हेपेटाइटिस बी, सी और डी का संक्रमण अलग तरीके से होता है। ये संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सिरिंज, टैटू बनवाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, रेजर, ब्लेड, नेल कटर और टूथब्रश साझा करने से फैल सकते हैं।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
हेपेटाइटिस की शुरुआत में मरीज को लगातार बुखार, कमजोरी, थकान, भूख कम लगना, मतली, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा गहरे रंग का पेशाब, जोड़ों में दर्द और आंखों व त्वचा का पीला पड़ना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करवानी चाहिए। समय पर बीमारी की पहचान होने से इलाज आसान हो जाता है और संक्रमण को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पानी को हमेशा फिल्टर करके या उबालकर ही पीना चाहिए। भोजन ताजा और अच्छी तरह पका हुआ होना चाहिए। बाहर का खुला खाना खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है। इसके अलावा शरीर की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस ए और बी का टीकाकरण संक्रमण से बचाव में काफी प्रभावी साबित होता है। बच्चों और जरूरतमंद लोगों को समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए। यदि परिवार में किसी व्यक्ति को हेपेटाइटिस संक्रमण है तो उसके संपर्क में सावधानी बरतनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और स्वच्छ आदतों को अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है। मानसून के मौसम में साफ पानी, सुरक्षित भोजन और व्यक्तिगत स्वच्छता को प्राथमिकता देकर लोग अपने लीवर को संक्रमण से सुरक्षित रख सकते हैं। लक्षण दिखने पर देरी किए बिना डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर उपाय है।





