
जींद: स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा संबंधित भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर एनएचएम कर्मियों ने गुरूवार को दो घंटे तक काम का बहिष्कार किया। कार्यकारी अध्यक्ष राजेश अलेवा ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा दो नवंबर 2021 को एनएचएम कर्मचारियों द्वारा कोरोना काल में की गई सेवा के एवज में सातवां वेतन देने की सैद्धान्तिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। परंतु तीन वर्ष नौ महीने बीत जाने पर अभी तक सातवां वेतन लागू नही किया गया है। अधिकारियों द्वारा बार-बार इसी सातवें वेतन आयोग से वंचित रखने के लिए तरह-तरह के ओच्छे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्ही हथकंडों में कर्मचारियों के चार माह के वेतन भुगतान रोकना भी शामिल है।
एनएचएम कर्मचारी पवन नागर ने बताया कि भाजपा सरकार के शासन काल में ही एनएचएम कर्मचारियों पर वित्त विभाग, श्रम विभाग द्वारा स्वीकृति उपरांत सेवा नियम लागू किए गए थे। परन्तु आज वही वित्त विभाग केंद्रीय परियोजना के कर्मचारी बता कर सेवा नियम फ्रीज करने की बात कर रहा है। यह इतिहास मे शायद ही सुनने को मिलेगा कि जिस सरकार द्वारा आमजन को कोई लाभ दिया गया हो, उसी लाभ को उसी सरकार के शासनकाल में ही अधिकारी छिनने पर उतारू हो। आज प्रदेश के प्रत्येक एनएचएम कर्मचारी में सरकार के इस कदम के प्रति भारी रोष है तथा सेवा नियम बचाने के लिये एनएचएम कर्मचारी सड़क से लेकर माननीय उच्च न्यायलय में संघर्षरत हैं।
एनएचएम कर्मचारियों की मांगों बिना कोई विलंब किए पूर्ण करें तथा रूके हुए वेतन को तुरंत जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश समिति के निर्णयानुसार मांगो को लेकर सांकेतिक आंदोलन के तौर पर 11 अगस्त से 14 अगस्त तक प्रतिदिन दो-दो घंटे कार्य का बहिष्कार किया गया है। यदि सरकार द्वारा मांगों के प्रति कोई ठोस कदम नही उठाया जाता है तो संघ की प्रदेश समिति जल्दी ही चरणबद्ध आंदोलन को आगे बढाते हुए आन्दोलन की अगामी गतिविधि घोषित कर दी जाएगी। इस मौके पर देवेंद्र, सोनिया, सुनीता, मंजू, सुमन, मोहन, संदीप, अनिल, गीता, प्रदीप, हरदीप, सलेंदर, विकास, सुमित इत्यादि मौजूद रहे।





