Hisar: डॉ. रामधन सिंह के योगदान की प्रो. बीआर कम्बोज ने की प्रशंसा

हिसार: खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व योगदान देने वाले महान कृषि वैज्ञानिक स्वर्गीय राव बहादुर डॉ. रामधन सिंह की 135वीं जयंती के अवसर पर हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय स्थित कमेटी कक्ष में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज मुख्य अतिथि रहे।
कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने शुक्रवार काे डॉ. रामधन सिंह के जीवन एवं कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने गेहूं, चावल, जौ एवं दलहनों की उन्नत किस्में विकसित करके भारतीय कृषि को नई दिशा दी। हरित क्रांति के दौरान उनके योगदान से हरियाणा एवं पंजाब में उत्पादन और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि डॉ. रामधन सिंह ने 1933-34 में गेहूं की प्रसिद्ध किस्में सी-518 एवं सी-५९१ विकसित की, जो अपनी उच्च उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधकता के लिए जानी जाती हैं।
उनके द्वारा विकसित बासमती चावल की अनेक किस्में तथा गेहूं की सी-306 आज भी लोकप्रिय हैं। अपने जीवनकाल में उन्होंने विभिन्न फसलों की 25 से अधिक उन्नत किस्में विकसित कीं। उन्होंने बताया कि डॉ. रामधन ने पारंपरिक खेती की बजाय वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया। वे कृषि शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे और उन्होंने किसानों तथा छात्रों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी, जिससे उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। उनके प्रयासों से खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ। कुलपति ने कहा कि वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए निरंतर अनुसंधान करना चाहिए। भारत में खाद्यान्न सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है, जिसे वैज्ञानिक प्रयासों से ही पूरा किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. रामधन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने डॉ. रामधन सिंह के द्वारा विकसित की गई विभिन्न उन्नत किस्मों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा गत वर्षों विकसित की गई किस्मों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश कुमार गोयल ने सभी का स्वागत किया। मंच संचालन एवं धन्यवाद प्रस्ताव गेहूं अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक व कर्मचारी भी उपस्थित रहे।





