Hisar: हिसार में साहित्यकार जयभगवान सैनी की पुस्तक का विमोचन समारोह

हिसार: वरिष्ठ साहित्यकार जयभगवान सैनी की नव प्रकाशित पुस्तक ‘म्हारे पक्षी’ का विमोचन पूरे उत्साह के साथ किया गया। शहर के गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की निदेशक डॉ. धर्मदेवी विद्यार्थी ने की, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधुकांत मुख्य अतिथि रहे। साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश कादयान, रामप्रकाश खटकड़, डॉ. मनोज भारत और डॉ. महेंद्र विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इस दौरान कैथल के कवि राजेश भारती को हंस कविता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साहित्य, कला और विचारों के माध्यम से समाज को प्रेरित करने वाली उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए जयभगवान सैनी को पटका पहनाकर सम्मानित किया गया।
पुस्तक विमोचन के बाद जयभगवान सैनी ने बताया कि उनकी अब तक 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा देने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने चिंता जताई कि आज की युवा पीढ़ी पुस्तकों से दूर होती जा रही है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि आधुनिक गैजेट्स के उपयोग के साथ-साथ अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का अध्ययन भी करें। जयभगवान सैनी ने बताया कि उनके द्वारा लिखित ‘श्री अमरनाथ धाम एवं गंगा मैया’, ‘डगर-डगर नगर-नगर’, ‘रास्तों में रास्ते’, ‘वे सुनहरे पल’ और ‘चलें धामों की ओर’ जैसे यात्रा संस्मरण पाठकों द्वारा काफी पसंद किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि उनके कविता संग्रह ‘उम्मीदें’, ‘फलों का फल’, ‘सब्जीनामा’, ‘धरोहर की पाती’ और ‘धरती मां’ (हरियाणवी अनुवादित) भी प्रकाशित हो चुके हैं।
इसके अलावा उनकी लघुकविता संग्रह ‘लुप्त-विलुप्त’ (हरियाणवी), ‘मन की गंगोत्री’, ‘स्मृति शेष : जयलालदास’, ‘प्रो. रूप देवगुण : अतीत की झलकियां’, ‘अतीत के झरोखे’, ‘एक बै अमराई मैं’ (हरियाणवी अनुवादित), ‘दिवस में दिवस’, ‘मैंने पूछा’, ‘अन्न पै अधिकार सभी का’ (हरियाणवी अनुवादित) और ‘विभूतियों की महिमा’ को भी पाठकों ने सराहा है।
जयभगवान सैनी ने बताया कि उन्होंने आत्मकथा ‘उमड़ती हरियाणवी यादें’, बाल साहित्य ‘कलरव करते पक्षी’, ‘पक्षियों का संसार’, ‘चुन्नू-मुन्नू’, कहानी संग्रह ‘घटना-दुर्घटना’ और ‘सैनिक जीवन : एक संघर्ष गाथा’ जैसी रचनाएं भी लिखी हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में रोहतक के बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय द्वारा उनके साहित्य को शोध के लिए स्वीकृति दिए जाने से उनका उत्साह बढ़ा है। अब उनके साहित्य पर शोध किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को उनकी रचनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।





