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हरियाणा Haryana : मेवात के सांठावाडी गांव में पानी की भारी किल्लत है। जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2018 में लगाया गया ट्यूबवेल नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेनीवेल परियोजना में अवैध कनेक्शन के चलते जलापूर्ति बाधित है।
सरपंच और ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे जिससे लोग टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं और आर्थिक रूप से परेशान हैं। ग्राम पंचायत सांठावाडी के ग्रामीण इन दिनों पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। गांव में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने वर्ष 2018 में पानी का एक ट्यूबवेल लगाया था। उसकी गहराई कम होने के कारण घरों तक पानी नहीं पहुंचता। यहां 1380 मतदाताओं के 4800 की आबादी वाले इस गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
सरपंच की माने तो रेनीवेल परियोजना के तहत गांव में लाइन लगाई थी। लेकिन उसमें हुए अवैध कनेक्शन के चलते पानी जलापूर्ति केंद्र तक नहीं पहुंचाता। लेकिन इसके जिम्मेदार अधिकारी समाधान करने के बजाए चैन की नींद में सो रहे हैं। वहीं, गांव के सरपंच ने कई बार जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ और अन्य अधिकारियों को शिकायतें दी है। लेकिन इन अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ।
यदि कोई ग्रामीण शिकायत करता है तो दूसरे या तीसरे दिन इन शिकायतों को रद्द कर दिया जाता है। कभी गलत आइटीआर भर देते हैं, तो कभी शिकायतकर्ता के बिना बुलाए हैं उन शिकायतों को निरस्त कर दिया जाता है। यह खेल पिछले कई साल से लगातार चल रहा है। वहीं, ऐसे में अब यहां की जनता जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से तंग आ चुकी है। लेकिन जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। गांव के लोग टैंकरों से पानी लेने को मजबूर हैं। ऐसे में एक परिवार का हर माह करीब 3000 रूपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
केवल कागजों तक सीमित योजना फिरोजपुर झिरका उपमंडल के अधिकांश गांवों में हर घर नल से जल योजना केवल कागजों तक सीमित है। इस योजना को कागजों में सुचारू रूप से चला हुआ दिखा रखा है। लेकिन वास्तव में इस योजना का लाभ 10 प्रतिशत लोग भी नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में सरकार और जिला प्रशासन को कार्रवाई की आवश्यकता है। सरकार जो योजना चलाती है वो आमजन के लिए होती है। लेकिन यहां पर बैठे अधिकारी इस योजना को जनता तक नहीं पहुंचाना चाहते हैं। वहीं, ऐसे में अब यहां की जनता जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से तंग आ चुकी है। लेकिन जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। गांव के लोग टैंकरों से पानी लेने को मजबूर हैं। ऐसे में एक परिवार का हर माह करीब 3000 रूपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
केवल कागजों तक सीमित योजना फिरोजपुर झिरका उपमंडल के अधिकांश गांवों में हर घर नल से जल योजना केवल कागजों तक सीमित है। इस योजना को कागजों में सुचारू रूप से चला हुआ दिखा रखा है। लेकिन वास्तव में इस योजना का लाभ 10 प्रतिशत लोग भी नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में सरकार और जिला प्रशासन को कार्रवाई की आवश्यकता है। सरकार जो योजना चलाती है वो आमजन के लिए होती है। लेकिन यहां पर बैठे अधिकारी इस योजना को जनता तक नहीं पहुंचाना चाहते हैं।
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