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हरियाणा के ड्रोन हब बनने के सपने को नई उड़ान, रूसी कंपनियां उत्साहित

Kiran
15 Oct 2026 12:13 PM IST
हरियाणा के ड्रोन हब बनने के सपने को नई उड़ान, रूसी कंपनियां उत्साहित
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Haryana हरियाणा का ड्रोन और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का सपना और मजबूत हो गया है। रूस की टेक्नोलॉजी कंपनियां हांसी के सिसाई में 'ड्रोन सिटी हरियाणा' में दो जॉइंट वेंचर (संयुक्त उद्यम) शुरू करने पर विचार कर रही हैं। रूस के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। इस दौरान निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त रिसर्च और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा हुई।
बातचीत मुख्य रूप से एडवांस्ड हेलीकॉप्टर ड्रोन बनाने और ऐसी नेविगेशन टेक्नोलॉजी विकसित करने पर केंद्रित रही, जिससे बिना जीपीएस (GPS) या सैटेलाइट-नेविगेशन सिग्नल के भी मानवरहित विमान (unmanned aircraft) काम कर सकें। एक प्रस्ताव के तहत, रूस की 'ओमनीटेक एलएलसी' (Omnitech LLC) और 'एवीपीएल इंटरनेशनल' (AVPL International) मिलकर सिसाई में एक यूनिट स्थापित कर सकती हैं। मुख्यमंत्री के सामने पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, इस मानवरहित हेलीकॉप्टर की रेंज 250 किमी तक और पेलोड क्षमता 200 किलोग्राम तक होगी।
इस यूनिट को केवल असेंबली यूनिट के रूप में नहीं, बल्कि एडवांस्ड मानवरहित हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म के लिए मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, टेस्टिंग और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है। ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल औद्योगिक लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और दूर-दराज या दुर्गम इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। अगर यह जॉइंट वेंचर फाइनल हो जाता है, तो यह हरियाणा के लिए एक बड़ा कदम होगा। इससे राज्य में मानवरहित हवाई प्रणालियों (unmanned aerial systems) और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक विशेष इकोसिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी।
ऐसे ड्रोन जो बिना जीपीएस के नेविगेट कर सकें
भारत और रूस के बीच प्रस्तावित दूसरा जॉइंट वेंचर तकनीकी रूप से और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
रूस की '4GNSS LLC/ओरिएंट सिस्टम्स ग्रुप' और 'एवीपीएल इंटरनेशनल' मिलकर ऐसी ड्रोन-नेविगेशन टेक्नोलॉजी विकसित करने पर विचार कर रही हैं, जो बिना जीपीएस/जीएनएसएस (GPS/GNSS) सिग्नल के भी काम कर सके। इस सिस्टम का मकसद ड्रोन को ऐसे मिशन पूरे करने में सक्षम बनाना है, जहां सैटेलाइट-नेविगेशन सिग्नल उपलब्ध न हों। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में भारतीय सेमीकंडक्टर चिप्स के इस्तेमाल के साथ-साथ, भारत में ही स्वदेशी टेक्नोलॉजी विकसित करने और मैन्युफैक्चरिंग करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
58.51 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन (Incentive)
रूस के साथ यह प्रस्तावित सहयोग, सिसाई और पूरे हिसार क्षेत्र को ड्रोन-मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की राज्य सरकार की मौजूदा कोशिशों को और बढ़ावा देगा। सैनी की अध्यक्षता वाले 'हरियाणा एंटरप्राइज प्रमोशन बोर्ड' ने 'हरियाणा एंटरप्राइजेज एंड एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी, 2020' के तहत AITMC वेंचर्स लिमिटेड के लिए 58.51 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी है। यह पैकेज हिसार जिले में ड्रोन और ड्रोन-पुर्जों के निर्माण का केंद्र (मैन्युफैक्चरिंग हब) विकसित करने के लिए दिया गया है।
28 सितंबर को हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा था कि वे ड्रोन निर्माण से जुड़े शोध को प्राथमिकता दें, स्टार्टअप्स को सुविधाएं मुहैया कराएं और युवाओं के तकनीकी कौशल को मजबूत करें। यह सब हरियाणा को 'ड्रोन कैपिटल' (ड्रोन राजधानी) के रूप में विकसित करने के राज्य के लक्ष्य का हिस्सा है। इस रणनीति के मुख्य केंद्र के रूप में सिसाई स्थित 'ड्रोन सिटी हरियाणा' उभर रहा है। इसकी आधारशिला सितंबर 2025 में रखी गई थी, जबकि इसके पहले चरण का उद्घाटन इस साल मई में कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने किया था।
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