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Haryana : सरकारी अस्पताल की लैब में लगी ऑटोमैटिक एनालाइजर मशीन एक साल से बेकार

Kavita2
26 Jun 2026 4:46 PM IST
Haryana : सरकारी अस्पताल की लैब में लगी ऑटोमैटिक एनालाइजर मशीन एक साल से बेकार
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Haryana हरियाणा: सरकारी अस्पताल (फर्स्ट रेफरल यूनिट) की लैब में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई ऑटोमैटिक एनालाइजर मशीन करीब एक साल बाद भी उपयोग में नहीं आ सकी है। यह मशीन मरीजों के लिए बेहतर जांच सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाई गई थी, लेकिन अब यह केवल शोपीस बनकर रह गई है।

जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष जून महीने में अस्पताल को यह आधुनिक मशीन उपलब्ध कराई गई थी। उम्मीद थी कि इसके जरिए मरीजों को एक ही स्थान पर कई महत्वपूर्ण जांचों की सुविधा मिल सकेगी और उन्हें निजी लैब्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन अब तक इसका नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है, जिससे अस्पताल की जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मशीन के पूरी तरह से उपयोग में न आने का मुख्य कारण इसके संचालन के लिए आवश्यक रीजेंट (Reagents) की अनुपलब्धता है। रीजेंट न होने की वजह से मशीन को चालू नहीं किया जा सका है, जिसके चलते मरीजों को आवश्यक जांच सेवाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।

इस स्थिति का सीधा असर क्षेत्र के मरीजों पर पड़ रहा है। जिन लोगों को समय पर लिवर, किडनी या अन्य बायोकेमिकल जांचों की आवश्यकता होती है, उन्हें या तो अन्य अस्पतालों या निजी लैब्स का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त खर्च बढ़ रही है।

यह ऑटोमैटिक एनालाइजर मशीन कई महत्वपूर्ण जांचों के लिए सक्षम है। इसमें लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), लिपिड प्रोफाइल सहित कई आवश्यक बायोकेमिकल जांचें की जा सकती हैं। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को सस्ती और त्वरित जांच सुविधा उपलब्ध कराना था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक मशीन होने के बावजूद उसका उपयोग न होना स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। मरीजों को बुनियादी जांच के लिए भी बाहर जाना पड़ रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

अस्पताल में पहले से ही संसाधनों की कमी की शिकायतें आती रही हैं, लेकिन इस मशीन के उपयोग में न आने से स्थिति और गंभीर हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि मशीन नियमित रूप से चालू होती, तो बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिल सकता था और जांच रिपोर्ट जल्दी उपलब्ध हो सकती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लैब उपकरण की सफलता केवल उसकी स्थापना पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके लिए आवश्यक सामग्री और नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी होता है। रीजेंट जैसी आवश्यक सामग्री की अनुपलब्धता के कारण महंगी मशीनें भी बेकार साबित हो सकती हैं।

इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि आवश्यक रीजेंट की आपूर्ति के लिए संबंधित विभाग को जानकारी दी गई है और प्रक्रिया जारी है। जैसे ही सामग्री उपलब्ध होगी, मशीन को पूर्ण रूप से चालू कर दिया जाएगा।

हालांकि, तब तक मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस समस्या का जल्द समाधान किया जाए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंच सके।

फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर सवाल खड़े कर रहा है। मरीजों को उम्मीद है कि जल्द ही मशीन का संचालन शुरू होगा और उन्हें जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

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