
Haryana हरियाणा: सरकार ने राजस्व व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए पटवारियों के कार्यक्षेत्र निर्धारण के नियमों में संशोधन किया है। अब पटवार सर्किलों का निर्धारण केवल भूमि क्षेत्रफल के आधार पर नहीं, बल्कि जनसंख्या और कार्यभार को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में छोटे पटवार सर्किल बनाए जाएंगे। ऐसे क्षेत्रों में एक सर्किल में अधिकतम 1500 एकड़ तक भूमि शामिल की जा सकेगी, ताकि वहां कार्यभार संतुलित रहे और नागरिकों को राजस्व सेवाएं समय पर मिल सकें।
इसके विपरीत, कम जनसंख्या वाले ग्रामीण और कम दबाव वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत बड़े पटवार सर्किल बनाए जाएंगे। इन क्षेत्रों में एक पटवारी के अधीन अधिकतम 2500 एकड़ तक भूमि रखी जा सकती है। सरकार का मानना है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस बदलाव को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग की ओर से सभी जिला उपायुक्तों को पटवार सर्किलों के पुनर्निर्धारण के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकारी आदेशों के अनुसार, राज्य में मध्य जुलाई तक नए पटवार सर्किलों का गठन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जिलों में तेजी से सर्वे और पुनर्गठन का काम किया जा रहा है।
अब तक हरियाणा में पटवार सर्किलों का निर्धारण मुख्य रूप से भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर किया जाता था, जिसके कारण कई जगहों पर पटवारियों पर असमान कार्यभार का दबाव देखा जाता था। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद इस असंतुलन को दूर करने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ग्रामीण प्रशासन को अधिक प्रभावी और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है। इससे न केवल राजस्व सेवाओं की गति बढ़ेगी, बल्कि लोगों को भी अपने काम के लिए कम समय और प्रयास खर्च करने होंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इस नई प्रणाली से राजस्व प्रशासन अधिक पारदर्शी, संतुलित और कुशल बनेगा तथा आम जनता को बेहतर सेवा उपलब्ध हो सकेगी।





