Gurugram: कौशिक जी महाराज ने साझा किया जीवन सफलता का सूत्र

गुरुग्राम: गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने समाज को गहरा संदेश देते हुए कहा कि धनवान बनों, कीर्तिवान बनों मगर घमंडी मत बनों। चाहे हिरण्यकश्यप हो, दशानन कंस हो। धरती पर घमंडियों का घमंड तोड़ दिया गया है। इनकी सत्ता कभी नहीं चली। देवता भी उसे ही स्वीकार करेंगें तो सहज, सरल होंगें। जो लोगों की तकलीफ को रोते रहेंगें, वो ही राम बनेंगें। जहां राम बन जाएगा, वहां रावण नहीं पनप पाएगा। यहां ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में चल रही श्री शिव महापुराण कथा एवं गोमहोत्सव के छठे दिन मंगलवार को उन्होंने यह बात कही।
प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने बताया कि श्री कौशिक जी महाराज ने मंगलवार को श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव के छठे दिन समाज को सुधारने से लेकर देवताओं की कृपा पर विस्तार से श्रोताओं का ज्ञानवर्धन किया। पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने गलत तरीके से धन अर्जित करने वालों को केंद्र में लेकर कहा कि आज उनके कुकर्मों की फाइलें खुल रही हैं। भला ऐसा धन किस काम का है। ऐसा धन कभी नहीं चाहिए। सदियों पहले महापुरुषों ने लिख दिया था कि ऐसा समय आएगा जब पैसे के पीछे आदमी अपराध और अन्यायी बनन जाएगा। आज समाज में यही हो रहा है। हम धन्य हैं कि हमारे भारत की संस्कृति आज भी जिंदा है। हमारे यहां आज भी संस्कारित लोगों की कमी नहीं है। श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि जीवन में सत्य और संयम होना चाहिए। राम जी सत्य हैं और संयम हनुमान जी हैं। जो इन दो चीजों को रखेगा, वही युद्ध जीत पाएगा। सत्य, संयम के बिना रावण को जीत नहीं पाएंगें।
उन्होंने कहा कि हमें अभिमान रूपी धनुष को तोडऩा है। जब तक यह धनुष नहीं टूटेगा तब तक शांति रूपी सीता हरण नहीं करेगी। अभिमान किसी चीज का नहीं होना चाहिए। यह व्यक्ति को खत्म कर देता है। अभिमानी व्यक्ति किसी को कुछ नहीं समझता। यही उनके पतन का कारण बनता है। अपने मकानों पर अपना नाम लिखवाने वालों को संदेश में पूज्य कौशिक जी महाराज ने कहा कि मकान पर नाम हटाकर लिखवा दो-आपका अपना घर। जिस घर में आप प्रवेश कर रहे हैं यह आपका है। शहरों, महानगरों में फ्लैट संस्कृति पर श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि जहां तक संभव हो फ्लैट ना खरीदें जमीन खरीदें। उस जमीन पर अपने रहने के साथ-साथ गौमाता का पालन करेंगे।





