
गुरुग्राम: दीपावली की खुशियों के बीच गुरुग्राम का वायु गुणवत्ता स्तर काफी बढ़ गया। यहां का एक्यूआई स्तर 469 तक पहुंंच गया। यह पर्यावरण प्रदूषण का बहुत ही खतरनाक स्तर रहा। पटाखों के धुएं के कारण यहां का पर्यावरण काफी प्रभावित हुआ। दीपावली पर सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन तक ग्रीन पटाखों की बिक्री की छूट दी गई थी। जिस तरह से यहां प्रदूषण का स्तर इतना अधिक बढ़ गया, उससे साफ है कि ग्रीन पटाखों की आड़ में प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की धड़ल्ले से बिक्री हुई।
लोगों द्वारा पटाखों की मांग को देखते हुए पटाखों के दाम भी कई गुणा तक बढ़ा दिए गए। बच्चों के पटाखों का एक पैकेट दिवाली से दो दिन पहले 250 रुपये में बिक रहा था, लेकिन दीपावली से एक दिन पहले और दिवाली वाले दिन उसे 500-600 रुपये तक में बेचा गया। यह तो सिर्फ एक पैकेट की बात है। बड़े लोगों के लिए बड़े बम-पटाखों के भी दाम कई गुणा वसूले गए। इन पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार, प्रशासन की तरफ से कोई प्रयास नजर नहीं आए। लोगों ने भारी मात्रा में पटाखे जमा कर लिए थे।
दिवाली की रात को इन पटाखों को जलाने के साथ ही पर्यावरण का स्तर काफी खतरनाक स्थिति में हो गया। मंगलवार की सुबह सड़कों, गलियों में बम-पटाखों के जले हुए अवशेष पड़े नजर आए। इनको देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सका कि रात के समय कितने पटाखे जलाए गए। इसी के साथ ही गुरुग्राम शहर का वायु गुणवत्ता स्तर (एक्यूआई) 469 रहा। इसे अति गंभीर स्थिति माना जाता है। दिवाली से एक दिन पहले भी वातावरण में कोहरे की तरह से प्रदूषण छाया रहा और दिवाली के एक दिन बाद मंगलवार को भी यही स्थिति रही।





