
चंडीगढ़। राजस्व विभाग के नए पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों और डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) की कथित खामियों को लेकर चल रहे पटवारियों और कानूनगो के आंदोलन के बीच हरियाणा सरकार ने मामले की जमीनी जांच कराने का फैसला लिया है।
गुरुवार को चंडीगढ़ में राजस्व अधिकारियों और रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि वरिष्ठ राजस्व अधिकारी खुद गांवों में जाकर डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रक्रिया का डेमो देखेंगे और इसकी व्यवहारिकता की जांच करेंगे।
गांवों में जाकर देखेंगे डिजिटल सर्वे की हकीकत
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अधिकारियों की टीम मौके पर जाकर यह समझेगी कि डिजिटल क्रॉप सर्वे को लागू करने में वास्तव में किस तरह की परेशानियां आ रही हैं।
वरिष्ठ राजस्व अधिकारी गांवों में जाकर फील्ड स्तर पर सर्वे प्रक्रिया को देखेंगे। इस दौरान यह जांच की जाएगी कि पोर्टल पर फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज करने में क्या तकनीकी समस्या आ रही है और क्या सिस्टम जमीन पर सही तरीके से काम कर रहा है।
सरकार का उद्देश्य है कि डिजिटल व्यवस्था को लागू करने से पहले उसकी व्यावहारिक चुनौतियों को समझा जाए।
पटवारी और कानूनगो जता रहे थे विरोध
राजस्व विभाग के नए पोर्टल और डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर पटवारी और कानूनगो लगातार अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे थे।
कर्मचारियों का कहना है कि पोर्टल में तकनीकी समस्याएं हैं, जिससे काम प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने कई सवाल उठाए हैं।
उनका तर्क है कि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को कई तरह की व्यवहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें दूर किए बिना नई व्यवस्था को लागू करना मुश्किल होगा।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से हुई चर्चा
गुरुवार को हुई बैठक में रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं।
बैठक के दौरान कर्मचारियों की ओर से पोर्टल की तकनीकी खामियों, सर्वे प्रक्रिया और काम के दबाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
अधिकारियों ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
सरकार लगातार राजस्व सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है। डिजिटल क्रॉप सर्वे इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
इसका उद्देश्य फसलों की सही जानकारी जुटाना, रिकॉर्ड को अपडेट करना और किसानों से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करना है।
हालांकि, किसी भी नई तकनीकी व्यवस्था को लागू करने में शुरुआती स्तर पर समस्याएं सामने आती हैं। सरकार अब इन्हीं चुनौतियों को समझकर सुधार करने की तैयारी में है।
फील्ड कर्मचारियों की भूमिका अहम
राजस्व विभाग में पटवारी और कानूनगो की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जमीन, फसल और स्थानीय रिकॉर्ड से जुड़े अधिकांश कार्य इन्हीं कर्मचारियों के माध्यम से पूरे किए जाते हैं।
ऐसे में डिजिटल क्रॉप सर्वे की सफलता के लिए फील्ड कर्मचारियों का सहयोग जरूरी माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करके ही डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है।
जांच के बाद लिया जाएगा आगे का फैसला
अधिकारियों के गांवों में जाकर स्थिति का जायजा लेने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर डिजिटल क्रॉप सर्वे और पोर्टल में आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं।
सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच हुई बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आंदोलन को लेकर भी जल्द समाधान निकल सकता है।
किसानों को भी मिलेगा लाभ
सरकार का कहना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे से किसानों को भविष्य में कई फायदे मिलेंगे। फसल रिकॉर्ड बेहतर होने से मुआवजा, बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ देने में आसानी होगी।
हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि सिस्टम पूरी तरह से सुचारू और भरोसेमंद तरीके से काम करे।
फिलहाल सरकार ने विवाद को खत्म करने के लिए जमीनी स्तर पर जांच का रास्ता चुना है। अब नजर इस बात पर है कि अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद डिजिटल क्रॉप सर्वे में क्या बदलाव किए जाते हैं।





