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Chandigarh चंडीगढ़। हरियाणा में पराली जलाने को लेकर जारी विवाद और बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को पराली प्रबंधन के लिए हर संभव मदद दे रही है। “जिसे जो भी जरूरत है, उसे उसी हिसाब से सब्सिडी (Subsidy) दी जाएगी,” मंत्री ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों पर दंड लगाना नहीं बल्कि उन्हें सुविधा देकर समाधान का रास्ता दिखाना है।
श्याम सिंह राणा ने चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हर किसान को उसकी मांग के अनुसार सब्सिडी दी जाएगी। अगर किसी किसान को मशीन की जरूरत है तो वह उसे खरीदेगा, और सरकार उस पर सब्सिडी देगी। इस तरह किसान अपने खेतों में मशीनों का इस्तेमाल कर पराली जलाने से बच सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार लगातार किसानों को पराली प्रबंधन मशीनें, जैसे स्ट्रॉ रीक, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर, बेलर मशीन आदि पर आकर्षक दरों पर सब्सिडी दे रही है। इन मशीनों के इस्तेमाल से फसल अवशेषों को खेत में ही खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और प्रदूषण भी नहीं फैलता।
मंत्री ने यह भी बताया कि हरियाणा सरकार ने इस साल पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया है। इसके तहत कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें ग्रामीण इलाकों में जाकर किसानों को जागरूक कर रही हैं। उन्होंने कहा, “सरकार किसानों को दंडित नहीं करना चाहती, बल्कि उन्हें सहयोग देना चाहती है ताकि वे पर्यावरण संरक्षण में भागीदार बन सकें।”
श्याम सिंह राणा ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने की परंपरा को खत्म करें, क्योंकि इसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के वायु प्रदूषण स्तर पर पड़ता है। उन्होंने कहा, “सरकार किसानों को विकल्प दे रही है, और जब मशीनों की मदद से खेत साफ होंगे तो किसी को भी पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
मंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक हजारों किसानों को सब्सिडी पर मशीनें दी जा चुकी हैं और जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के आवेदन जल्द से जल्द मंजूर करें। विशेषज्ञों के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब में हर साल करीब 200 लाख टन पराली निकलती है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा जला दिया जाता है। इससे न केवल वातावरण में PM 2.5 और PM 10 जैसे प्रदूषक तत्व बढ़ते हैं बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब होती है।
सरकार अब किसानों को जैविक और यांत्रिक दोनों तरीकों से समाधान दे रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर मिलकर काम किया जा रहा है ताकि आने वाले सालों में हरियाणा “पराली मुक्त राज्य” बन सके।
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