
चंडीगढ़। धान की सरकारी खरीद का समय नजदीक आने के साथ हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों से फसल काटने में जल्दबाजी नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसान धान के पूरी तरह पकने का इंतजार करें और निर्धारित सीमा से अधिक नमी वाली उपज मंडियों में लेकर न आएं। अच्छी तरह पकी और सूखी फसल मंडी पहुंचने पर उसकी गुणवत्ता जांचने और खरीद करने में कम समय लगेगा। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।
कृषि मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में भाजपा के ‘गीता कमल’ कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने आगामी धान खरीद सत्र, फसल की गुणवत्ता और आधुनिक कटाई व्यवस्था के कारण सामने आने वाली समस्याओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन और खरीद एजेंसियों का सहयोग करें।
मशीन से कटाई के बाद बढ़ती है नमी की समस्या
श्याम सिंह राणा ने कहा कि पहले किसान धान की कटाई मुख्य रूप से हाथ से करते थे। कटाई के बाद फसल कुछ समय तक खेत में पड़ी रहती थी, जिससे उसे प्राकृतिक रूप से सूखने का अवसर मिल जाता था। इसके बाद किसान उसकी मड़ाई कर अनाज मंडी में लेकर जाते थे। इस प्रक्रिया में धान की नमी काफी हद तक कम हो जाती थी और फसल खरीद मानकों के अनुरूप तैयार हो जाती थी।
अब कृषि क्षेत्र में कंबाइन हार्वेस्टर और दूसरी आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ गया है। इन मशीनों से कटाई और मड़ाई का काम एक साथ और बहुत कम समय में पूरा हो जाता है। किसान अक्सर मशीन से निकला धान सीधे ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर मंडी ले जाते हैं। यदि फसल पूरी तरह पकी न हो या कटाई से पहले बारिश हुई हो तो ऐसे धान में नमी अधिक रह सकती है।
कृषि मंत्री ने कहा कि अधिक नमी वाली फसल मंडी पहुंचने पर खरीद एजेंसियों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के कारण उसे तुरंत खरीदने में कठिनाई होती है। ऐसी स्थिति में किसानों को धान सुखाने या दोबारा मंडी लाने के लिए कहा जा सकता है। इससे किसान का समय और श्रम दोनों बढ़ते हैं। मंडियों में भी अनावश्यक भीड़ तथा वाहनों की लंबी कतारें लगने की आशंका रहती है।
खेत या घर पर धान सुखाने की सलाह
कृषि मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि मशीन से धान कटवाने के बाद उसे कुछ समय के लिए खेत, खलिहान या साफ और सुरक्षित स्थान पर फैलाकर सुखाएं। धान को समय-समय पर पलटते रहने से उसमें मौजूद अतिरिक्त नमी कम हो सकती है। पूरी तरह सूखने और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होने के बाद ही उसे मंडी लेकर जाना किसानों के हित में रहेगा।
उन्होंने कहा कि किसान केवल जल्द फसल बेचने के उद्देश्य से अधपका धान न काटें। समय से पहले कटाई करने पर न केवल दानों में नमी अधिक होती है, बल्कि उनका वजन, रंग और गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। कई बार अधपके दाने टूटने लगते हैं, जिससे किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
धान की कटाई का सही समय फसल की किस्म, बुवाई की तारीख और स्थानीय मौसम पर निर्भर करता है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही कटाई का निर्णय लें। बारिश की संभावना होने पर भी फसल की स्थिति को समझते हुए सावधानी बरतना आवश्यक है।
जल्दी खरीद के लिए गुणवत्ता जरूरी
राणा ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसानों को मंडियों में अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए मंडियों में खरीद, उठान, भंडारण और भुगतान की व्यवस्थाएं की जाती हैं। इसके बावजूद खरीद की गति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि किसान किस गुणवत्ता और नमी स्तर की फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं।
यदि धान अच्छी तरह पका और सूखा होगा तो नमी तथा दूसरी गुणवत्ता जांच पूरी होने के बाद खरीद प्रक्रिया जल्द संपन्न हो सकती है। दूसरी ओर, अधिक नमी वाली उपज पहुंचने से किसान और खरीद एजेंसी के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कृषि मंत्री ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए किसानों को पहले से जागरूक होना चाहिए।
हरियाणा में पूर्व के खरीद सत्रों में सरकार ने निर्धारित नमी सीमा तक मानकों पर खरा उतरने वाले धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। खरीद केंद्रों पर नमी की जांच के लिए उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि मंडी जाने से पहले संभव हो तो अपने धान की नमी की जांच करा लें।
मंडियों में भीड़ कम करने में मिलेगी मदद
कृषि मंत्री के मुताबिक, चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह तैयार फसल मंडी पहुंचने पर व्यवस्था बेहतर बनी रहती है। एक साथ बड़ी मात्रा में गीला या अधपका धान पहुंचने से मंडी परिसर में जगह की कमी हो सकती है। उठान प्रभावित होने और बोरियों का ढेर लगने पर खरीद व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
उन्होंने किसानों से कहा कि वे मंडी में फसल ले जाने से पहले संबंधित खरीद केंद्र की व्यवस्था और स्थानीय निर्देशों की जानकारी जरूर प्राप्त करें। साफ-सुथरा तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप धान लेकर पहुंचने से तुलाई, खरीद और उठान में तेजी आएगी।
कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों की भी जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित गुणवत्ता नियमों का पालन करें। सही समय पर कटाई, पर्याप्त सुखाई और साफ फसल मंडी में लाने से खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम होगी तथा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिल सकेगा।





