
गुरुग्राम। भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन और कारगिल युद्ध के वेटरन अमित कुमार गुप्ता पर पार्किंग विवाद के दौरान लोहे की रॉड से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आई है और बाएं हाथ की हड्डी टूट गई। घायल पूर्व सैन्य अधिकारी का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। शिकायत के आधार पर सेक्टर-65 पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस के अनुसार, अमित कुमार गुप्ता वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के अभियान “ऑपरेशन सफेद सागर” का हिस्सा थे। उन्होंने रविवार को घटना के संबंध में लिखित शिकायत दी। इसके बाद संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रारंभ में प्राथमिकी अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज होने की बात सामने आई थी, लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की सहायता से संदिग्ध पार्किंग कर्मचारी की पहचान कर लेने का दावा किया है। खबर लिखे जाने तक आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।
परिवार के साथ डिनर करने गए थे गुप्ता
शिकायत के मुताबिक, घटना 10 सितंबर की रात करीब आठ बजे हुई। रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन अमित कुमार गुप्ता अपने परिवार के साथ डिनर करने के लिए एम3एम मैग्नम बिजनेस पार्क स्थित एक रेस्टोरेंट पहुंचे थे। उन्होंने अपने परिवार को रेस्टोरेंट के प्रवेश द्वार के पास उतारने के बाद कार खड़ी करने के लिए पार्किंग की ओर रुख किया।
गुप्ता का आरोप है कि पार्किंग कर्मचारियों ने उन्हें परिसर के कई निर्धारित पार्किंग स्थलों पर कार खड़ी नहीं करने दी। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह भेजा गया। काफी देर तक पार्किंग नहीं मिलने के बाद जब वह कार पीछे करने लगे तो एक कर्मचारी ने कथित रूप से उनकी कार की खिड़की पर मुक्के मारने शुरू कर दिए।
पूर्व सैन्य अधिकारी ने कार से नीचे उतरकर इसका विरोध किया। आरोप है कि इसी दौरान पार्किंग कर्मचारी ने लोहे की रॉड निकाल ली और गुप्ता के सिर तथा बाएं हाथ पर कई वार किए। हमले के बाद कर्मचारी मौके से भाग गया। घायल गुप्ता को बाद में इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
सीसीटीवी फुटेज में मारपीट की पुष्टि का दावा
सेक्टर-65 पुलिस थाना प्रभारी रामबीर सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गुप्ता को परिसर में अलग-अलग पार्किंग स्थलों पर भेजे जाने के बाद विवाद शुरू हुआ था। पुलिस अधिकारियों ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी है।
सहायक पुलिस आयुक्त अभिलाक्ष जोशी ने मीडिया को बताया कि प्रथम दृष्टया सीसीटीवी फुटेज में पूर्व सैन्य अधिकारी के साथ लोहे की रॉड से मारपीट होती दिखाई दे रही है। उनके हाथ में फ्रैक्चर होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस प्रवक्ता एएसआई संदीप कुमार के मुताबिक, संदिग्ध की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। घटना तथा पुलिस के प्रारंभिक निष्कर्षों का विवरण में भी दिया गया है।
मेडिकल रिपोर्ट पर लगाए गंभीर आरोप
अमित कुमार गुप्ता ने अस्पताल में तैयार की गई मेडिको-लीगल केस यानी एमएलसी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रिपोर्ट में उनकी चोटों का सही विवरण दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि घटना के बाद उनके सिर से खून बह रहा था और बाईं कोहनी तथा हाथ में गंभीर चोट लगी थी, लेकिन इन बातों को एमएलसी में समुचित रूप से शामिल नहीं किया गया।
पूर्व सैन्य अधिकारी का यह भी आरोप है कि घटना के तुरंत बाद उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली। उन्होंने पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया को लेकर भी असंतोष जताया है। हालांकि, अस्पताल की ओर से एमएलसी पर लगाए गए आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए रिपोर्ट को “झूठी” बताने का दावा फिलहाल शिकायतकर्ता का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र जांच और मेडिकल दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
घटनास्थल के पते को लेकर भ्रम
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में घटनास्थल को सेक्टर-65 स्थित मैग्नम ग्लोबल पार्क बताया गया है। हालांकि, पुलिस और प्रमुख मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक घटना एम3एम मैग्नम बिजनेस पार्क में हुई, जो सेक्टर-58 में स्थित है। प्राथमिकी सेक्टर-65 पुलिस थाने में दर्ज की गई है। इसलिए सेक्टर-65 का उल्लेख पुलिस थाने के संदर्भ में है, न कि अनिवार्य रूप से घटनास्थल के पते के रूप में।
इस अंतर को स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि गलत स्थान प्रकाशित होने से खबर भ्रामक हो सकती है। रेस्टोरेंट के नाम का उल्लेख कुछ रिपोर्टों में “गोंजो” के रूप में किया गया है, जबकि उपलब्ध आधिकारिक पुलिस बयान में प्रतिष्ठान के नाम का विस्तृत उल्लेख नहीं है।
ऑपरेशन सफेद सागर से जुड़े रहे गुप्ता
“ऑपरेशन सफेद सागर” वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाया गया सैन्य अभियान था। इस अभियान में वायुसेना ने दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भारतीय थलसेना की सहायता की थी। पुलिस के अनुसार अमित कुमार गुप्ता उसी अभियान से जुड़े रहे थे और बाद में ग्रुप कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हुए।
एक पूर्व सैन्य अधिकारी पर सार्वजनिक व्यावसायिक परिसर में कथित हमले की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्किंग प्रबंधन में तैनात कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, पहचान सत्यापन और व्यवहार संबंधी निगरानी की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। परिसर प्रबंधन अथवा पार्किंग एजेंसी की ओर से घटना पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल दस्तावेज और शिकायतकर्ता द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद विवाद के वास्तविक कारण तथा घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।





