
Haryana हरियाणा में खेतों में आग लगने की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी हैं और 2023 में तो यह घटनाएं रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। किसानों द्वारा कृषि कार्यों के बाद बची हुई फसल की पत्तियों और बाकी अवशेषों को जलाने की वजह से इन घटनाओं में इजाफा हो रहा है। इस प्रथा को 'पढ़ाई बर्निंग' (stubble burning) कहा जाता है, जो खासकर धान की फसल कटने के बाद होती है। इस वर्ष, यह घटनाएं पिछले पांच सालों के मुकाबले सबसे ज्यादा देखने को मिली हैं, और यह हरियाणा राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
कारण और प्रभाव
खेतों में आग लगने के पीछे मुख्य कारण है, किसानों के पास इन फसल अवशेषों को नष्ट करने का कोई पर्यावरणीय या तकनीकी विकल्प न होना। कृषि कार्यों के दौरान समय की बचत और लागत में कमी लाने के लिए किसान खेतों में बचे अवशेषों को जलाना आसान समझते हैं। हालांकि, यह पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है और इससे जलवायु परिवर्तन की समस्या को और बढ़ावा मिलता है। धान की कटाई के बाद खेतों में जलने वाले अवशेषों से वायुमंडल में प्रदूषण फैलता है, जो वायु गुणवत्ता में गिरावट का कारण बनता है।
इसके अलावा, इस आग से आसपास के क्षेत्रों में जन जीवन प्रभावित होता है, जिससे कई बार निकटवर्ती गांवों और शहरों में धुंआ फैल जाता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। यही नहीं, यह आग आसपास के जंगलों और अन्य कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचाती है, जिससे स्थानीय वन्य जीवन और जीव-जंतुओं की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हरियाणा सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और विभिन्न उपायों की घोषणा की है। राज्य में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए, सरकार ने कृषि अवशेषों को जलाने के खिलाफ कई नियम लागू किए हैं और किसानों को इससे बचने के लिए प्रोत्साहित किया है। राज्य सरकार ने कृषि मशीनरी जैसे कि स्ट्रॉ चिपर्स और हैप्पी सीडर्स की सब्सिडी देने की योजना बनाई है, ताकि किसान इन उपकरणों का उपयोग करके फसल के अवशेषों को जलाए बिना नष्ट कर सकें।
इसके अतिरिक्त, पर्यावरण मंत्रालय और राज्य प्रशासन ने भी इस मामले में सख्त कदम उठाए हैं। किसानों को चेतावनी दी गई है कि यदि वे अवशेष जलाने की प्रक्रिया जारी रखते हैं, तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने ‘नमामि गंगे’ जैसी योजनाओं के तहत प्रदूषण नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए हैं।
समाधान और भविष्य की दिशा
इस बढ़ती समस्या का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से नहीं हो सकता, बल्कि किसानों को भी जागरूक करना होगा। कृषि अवशेषों के प्रबंधन के लिए किसानों को बेहतर तकनीकी समाधान उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकारों को किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, ताकि वे पर्यावरण के अनुकूल और आर्थिक रूप से सस्ता तरीका अपनाएं।
साथ ही, किसानों के लिए नई तकनीकों और उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाई जाए, ताकि वे फसल अवशेषों को जलाए बिना नष्ट कर सकें। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन उपकरणों की लागत कम हो और अधिक से अधिक किसान इनका उपयोग करें। इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि किसानों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास हो और वे अपने भविष्य और आने वाली पीढ़ी के लिए इस समस्या का समाधान खोजें।
हरियाणा में खेतों में आग लगने की बढ़ती घटनाएं एक गंभीर चुनौती बन गई हैं, लेकिन यदि सभी संबंधित पक्षों द्वारा मिलकर काम किया जाए, तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।





