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Faridabad: चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से लापता किशोर 2 साल बाद लौटकर अपने घर पहुंचा

Admindelhi1
4 April 2025 3:18 PM IST
Faridabad: चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से लापता किशोर 2 साल बाद लौटकर अपने घर पहुंचा
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"बुजुर्ग दादी ने उसे कुछ दिनों तक ढूंढा और फिर आस छोड़ दी"

फरीदाबाद: सराय फाटक के पास कॉलोनी में रहने वाला 10 साल का किशोर 2 साल पहले कॉलोनी में आने वाले एक बाबा के साथ घूमने निकल गया था। जिसके बाद से वो घर नहीं लौटा। मां की मौत हो चुकी थी और पिता भी दूसरी शादी कर यूपी में रहने लगे। बुजुर्ग दादी ने उसे कुछ दिनों तक ढूंढा और फिर आस छोड़ दी। लेकिन अब चाइल्ड हेल्पलाइन संस्था के प्रयास से किशोर अपनी दादी रामवती तक पहुंच गया है।

चाइल्ड हेल्पलाइन जिला बाल संरक्षण इकाई फरीदाबाद के प्रदीप कुमार ने बताया कि मध्यप्रदेश के बुरहानपुर स्थित शेल्टर होम से लगभग 4 महीने पहले किशोर के बारे में सूचना मिली थी। वहां से बताया गया कि लगभग साढ़े 11 साल का लड़का है जो ज्यादा बात नहीं करता है। लेकिन वो सराय फाटक के पास अपना घर बता रहा है। प्रदीप कुमार ने टीम के साथ फरीदाबाद के थानों में संपर्क करना शुरू किया लेकिन किशोर की गुमशुदगी की रिपोर्ट कहीं भी दर्ज नहीं मिली।

आखिरकार मध्यप्रदेश बुरहानपुर से शेल्टर होम की टीम किशोर को लेकर फरीदाबाद पहुंची। बुधवार को लगभग 6 घंटे तक सराय फाटक के आस-पास की कॉलोनियों दयाल नगर, सराय फाटक व ग्रीन फील्ड की गलियों में घुमाया। इस दौरान सराय फाटक के पास पहुंचने पर किशोर ने एक गली की ओर इशारा किया। गली के एक दुकानदार ने किशोर को पहचान लिया। दुकानदार ने बताया कि इसी गली में किशोर की दादी पहले रहती थी लेकिन अब वो दूसरी गली में रहती हैं। किशोर की दादी रामवती तक टीम किशोर को लेकर पहुंची तो दादी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। फिर उसकी बुआ भी यहां आई। टीम ने कागजी कार्रवाई पूरी कर किशोर को दादी के हवाले कर दिया।

18 जुलाई 2023 को बुरहानपुर शेल्टर होम पहुंचा था किशोर: किशोर की दादी से पता चला कि कॉलोनी में आने वाले एक बाबा के साथ अक्सर किशोर आस-पास की गलियों तक खेलते हुए चला जाता था। दो साल पहले भी ऐसा ही हुआ था लेकिन ये वापस नहीं लौटा। यहां से दिल्ली जाकर ट्रेन पकड़ किशोर मध्यप्रदेश के बुरहानपुर रेलवे स्टेशन पर उतर गया था। वहां रेलवे पुलिस ने इसे देखकर शेल्टर होम भेज दिया था। जिसके बाद से किशोर के परिवार की तलाश शुरू हुई। कई बार काउंसलिंग के बावजूद किशोर सराय फाटक ही बता पा रहा था।

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