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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सरकार से बनी सहमति
Ratna Netam
23 Oct 2026 8:54 PM IST

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चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बड़ी राहत की खबर सामने आई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज की कर्मचारी यूनियनों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद बिजली कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का ऐलान कर दिया। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति बनने के बाद बिजली आपूर्ति सामान्य करने का काम शुरू कर दिया गया। इस फैसले से राज्य के उन लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जो हड़ताल के कारण बिजली कटौती और अन्य परेशानियों का सामना कर रहे थे।
मुख्यमंत्री सैनी ने दिया निजीकरण नहीं होने का भरोसा
बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बिजली क्षेत्र के निजीकरण के पक्ष में नहीं है और कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के साथ खड़ी है और उनकी जायज मांगों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बिजली कर्मचारियों से प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपील की।सरकार के इस आश्वासन के बाद कर्मचारी संगठनों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।
बिजली अधिनियम की धारा 108 लागू करने का फैसला
विवाद के समाधान के लिए हरियाणा सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई करने का फैसला लिया है। इसके माध्यम से हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) को जनहित से जुड़े नीतिगत निर्देश दिए जा सकते हैं।सरकार ने गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण कंपनी को दिए गए समानांतर वितरण लाइसेंस के आदेश की समीक्षा कराने की दिशा में कदम उठाया है।हालांकि, धारा 108 लागू करने से नियामक आयोग का आदेश स्वतः रद्द नहीं होता। इस संबंध में आगे की कार्रवाई नियामकीय और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस देने से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 वर्षों का समानांतर लाइसेंस देने का आदेश जारी किया थाइस फैसले का बिजली कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि बिजली वितरण में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से सरकारी बिजली निगमों और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।कर्मचारी संगठनों ने आशंका जताई थी कि इस फैसले का असर भविष्य में बिजली दरों और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। इसी विरोध के चलते 22 अक्टूबर से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की गई थी।
हड़ताल से कई जिलों में प्रभावित हुई थी बिजली आपूर्ति
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह सहित हरियाणा के कई इलाकों में देखने को मिला था। बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ाकई क्षेत्रों में बिजली खराबी की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो सका। इससे पेयजल आपूर्ति, घरेलू कामकाज और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।कुछ स्थानों पर लंबे समय तक बिजली नहीं आने से स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। बिजली संकट के कारण प्रशासन पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया था।
अनिल विज ने बातचीत से निकाला समाधान
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार सुबह ही कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालने को तैयार है।विज ने कर्मचारी नेताओं के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से बातचीत की। इसके बाद सरकार ने धारा 108 के उपयोग सहित अन्य कानूनी विकल्पों पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया।सरकार ने यह भी कहा है कि वह निजी कंपनी को दिए गए वितरण लाइसेंस के मामले को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष उठाएगी।
बिजली आपूर्ति सामान्य करने पर जोर
सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बनी सहमति के बाद हड़ताल समाप्त होने से प्रदेश में बिजली सेवाओं के सामान्य होने का रास्ता साफ हो गया है।अब बिजली विभाग के सामने प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति पूरी तरह बहाल करने और लंबित शिकायतों का समाधान करने की चुनौती है।मुख्यमंत्री सैनी ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हितों को ध्यान में रखते हुए आगे भी बातचीत जारी रखेगी। वहीं, बिजली वितरण लाइसेंस से जुड़े विवाद का अंतिम समाधान संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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