हरियाणा

CM सैनी से बातचीत के बाद बिजली कर्मचारियों का बड़ा फैसला

Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 7:23 PM IST
CM सैनी से बातचीत के बाद बिजली कर्मचारियों का बड़ा फैसला
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पंचकूला। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में चल रही कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज की मौजूदगी में बिजली कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक के बाद कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया है। इससे राज्य में बिजली आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
पंचकूला स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ऊर्जा मंत्री अनिल विज, बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का मुख्य मुद्दा गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने का फैसला था।हालांकि, उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में बैठक शुरू होने और सरकार के समाधान संबंधी प्रस्ताव की पुष्टि हुई है। हड़ताल समाप्त करने की औपचारिक घोषणा और समझौते की पूरी शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई अहम बैठक
हरियाणा में लगातार बढ़ते बिजली संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद मामले को सुलझाने की पहल की।शुक्रवार को पंचकूला के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया गया।बैठक में बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।सरकार की प्राथमिकता बिजली आपूर्ति को सामान्य करना और कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान निकालना रही।मुख्यमंत्री की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कर्मचारी संगठन निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले का लगातार विरोध कर रहे थे।
तीन दिन की हड़ताल से बिजली व्यवस्था प्रभावित
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था।इस आंदोलन में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम से जुड़े कर्मचारी तथा इंजीनियर शामिल हुए।हड़ताल के कारण राज्य के कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।विशेष रूप से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पंचकूला के कई इलाकों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आईं।कुछ स्थानों पर कर्मचारियों के काम पर नहीं लौटने के कारण बिजली की खराबियों को ठीक करने में भी देरी हुई।बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम नागरिकों के साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को मिला लाइसेंस
पूरे विवाद की शुरुआत हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के एक फैसले से हुई।आयोग ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने की मंजूरी दी थी।यह लाइसेंस 25 वर्षों की अवधि के लिए जारी किया गया है।
कर्मचारी संगठनों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण की अनुमति देने से सरकारी बिजली निगमों के हित प्रभावित हो सकते हैं।कर्मचारियों ने आशंका जताई कि इस फैसले का असर भविष्य में सरकारी बिजली व्यवस्था और रोजगार पर भी पड़ सकता है।इसी कारण बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने संयुक्त रूप से आंदोलन शुरू किया था।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने दिया था समाधान का भरोसा
बैठक से पहले ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की थी।उन्होंने कहा था कि सरकार बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने के लिए तैयार है।शुक्रवार सुबह पंचकूला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान विज ने बताया कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चर्चा हो चुकी है।उन्होंने भरोसा जताया था कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकल सकता है।ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार बिजली वितरण के निजीकरण से जुड़े फैसले की समीक्षा के लिए कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
विद्युत अधिनियम की धारा 108 बनी चर्चा का केंद्र
कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच बातचीत में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 महत्वपूर्ण मुद्दा रही।इस प्रावधान के तहत राज्य सरकार सार्वजनिक हित से जुड़े नीतिगत मामलों में राज्य विद्युत नियामक आयोग को निर्देश दे सकती है।ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा था कि सरकार इस प्रावधान का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है।इस कदम का उद्देश्य गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को जारी बिजली वितरण लाइसेंस से संबंधित विवाद का समाधान निकालना है।हालांकि, धारा 108 के अंतर्गत निर्देश जारी करने और नियामक आयोग के आदेश के स्वतः निरस्त हो जाने में कानूनी अंतर है।लाइसेंस के संबंध में अंतिम निर्णय लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
बिजली संकट से आम लोगों को हुई परेशानी
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर दिखाई दिया।गुरुग्राम के कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आई थीं।बिजली नहीं आने से लोगों को पेयजल की समस्या का भी सामना करना पड़ा।
कई घरों में मोटर और पानी के पंप नहीं चल सके।
वहीं, दुकानदारों और व्यापारियों को भी बिजली कटौती के कारण परेशानी हुई।कुछ इलाकों में नाराज लोगों ने बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया।प्रशासन ने बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की थीं, लेकिन कई स्थानों पर समस्याएं बनी रहीं।
कर्मचारियों की चिंताओं पर सरकार ने की चर्चा
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग निजी कंपनी को दिए गए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस से संबंधित थी।उनका कहना था कि सरकारी बिजली निगम लंबे समय से प्रदेश में बिजली वितरण का काम कर रहे हैं।ऐसे में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस दिए जाने से सरकारी निगमों की कार्यप्रणाली और आर्थिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है।कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले की समीक्षा करने और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।सरकार ने बातचीत के दौरान कानूनी विकल्पों के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने की बात कही।
हड़ताल समाप्त होने से राहत की उम्मीद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बातचीत के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की है।इससे प्रभावित क्षेत्रों में बिजली वितरण और रखरखाव की सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है।हालांकि, जिन स्थानों पर तकनीकी खराबियां मौजूद हैं, वहां बिजली आपूर्ति बहाल होने में अतिरिक्त समय लग सकता है।आपूर्ति सामान्य होने की वास्तविक स्थिति संबंधित बिजली निगमों के आंकड़ों से स्पष्ट होगी।अब कर्मचारियों की निगाहें निजी कंपनी के लाइसेंस को लेकर सरकार के अगले निर्णय पर भी रहेंगी।
आगे क्या होगा?
हरियाणा सरकार निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ उपलब्ध कानूनी रास्तों पर विचार कर रही है।इसमें विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश देने के साथ संबंधित आदेश को उचित मंच पर चुनौती देने का विकल्प भी शामिल है।सरकार के अगले कदम से यह स्पष्ट होगा कि निजी कंपनी के लाइसेंस पर क्या प्रभाव पड़ता है।इसके अलावा कर्मचारी संगठनों की अन्य लंबित मांगों को लेकर भी आगे बातचीत हो सकती है।
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