
फरीदाबाद। करनेरा चौक पर छह दिन पहले बाइक की टक्कर से घायल हुई छात्रा के मामले में उसके पिता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पिता का आरोप है कि दुर्घटना की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद होने के बावजूद बाइक सवार की पहचान करने के बजाय पुलिस उनसे ही वाहन का नंबर उपलब्ध कराने को कह रही है। उनका कहना है कि बेटी के इलाज की चिंता के बीच अब उन्हें आरोपी की तलाश के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।
पीड़ित छात्रा के पिता के मुताबिक, दुर्घटना करने वाला बाइक सवार घटना के बाद मौके से निकल गया। हादसे में उनकी बेटी घायल हुई और उसका उपचार कराना पड़ा। घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी बाइक सवार की पहचान और गिरफ्तारी नहीं होने से परिवार में नाराजगी है।
सीसीटीवी में कैद है हादसा
पिता का दावा है कि करनेरा चौक पर हुई दुर्घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। फुटेज में बाइक और दुर्घटना का घटनाक्रम दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि यदि फुटेज की तकनीकी तरीके से जांच की जाए तो बाइक के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
इसके बावजूद पुलिस उनसे बाइक का नंबर पूछ रही है। पिता का सवाल है कि हादसे के वक्त उनकी प्राथमिकता घायल बेटी को संभालने की थी, ऐसे में वह टक्कर मारकर भागने वाली बाइक का नंबर कैसे नोट कर सकते थे।
उन्होंने मांग की है कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच कर बाइक की पहचान की जाए और चालक तक पहुंचने की कोशिश की जाए।
छह दिन बाद भी नहीं मिला बाइक सवार
हादसे को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार के अनुसार बाइक सवार का सुराग नहीं लग सका है। इससे परिवार की परेशानी बढ़ गई है।
पिता का कहना है कि पुलिस उनसे लगातार बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराने की बात कह रही है। दूसरी तरफ परिवार का तर्क है कि वाहन की पहचान करना जांच का हिस्सा है और इसके लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा सकती है।
करनेरा चौक के अलावा बाइक जिस दिशा में गई, उस मार्ग पर लगे अन्य कैमरों की फुटेज भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बेटी के इलाज के साथ लगा रहे थाने के चक्कर
हादसे में छात्रा के घायल होने से परिवार पहले ही परेशान है। पिता का आरोप है कि बेटी के उपचार के साथ उन्हें मामले में कार्रवाई के लिए भी प्रयास करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि परिवार चाहता है कि दुर्घटना करने वाले बाइक चालक की जल्द पहचान हो और उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। घटना के इतने दिन बाद भी आरोपी का पता नहीं चलने से उन्हें जांच की गति को लेकर चिंता है।
हालांकि मामले में पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अब तक जांच में कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं और सीसीटीवी फुटेज से क्या जानकारी मिली है।
वाहन का नंबर पहचानना हो सकता है चुनौती
कई सड़क दुर्घटनाओं में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होता है, लेकिन हर फुटेज से वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर स्पष्ट रूप से पढ़ पाना संभव नहीं होता। कैमरे की गुणवत्ता, वाहन की गति, दूरी, रोशनी और रिकॉर्डिंग के एंगल पर काफी कुछ निर्भर करता है।
यदि घटना वाले कैमरे में नंबर स्पष्ट नहीं दिखाई देता तो पुलिस बाइक के आने और जाने वाले मार्ग पर लगे दूसरे कैमरों की रिकॉर्डिंग की मदद ले सकती है। इससे वाहन के रूट का पता लगाने और बेहतर फुटेज तलाशने में मदद मिल सकती है।
पिता का दावा है कि मौजूदा फुटेज से जांच आगे बढ़ाई जा सकती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस की तकनीकी जांच में क्या सामने आता है।
हादसे के बाद वाहन चालक की जिम्मेदारी
सड़क दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति को सहायता पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है। यदि कोई वाहन चालक दुर्घटना के बाद मौके से चला जाता है तो उसकी पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है।
ऐसे मामलों में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, वाहन के रंग और मॉडल की जानकारी तथा घटनास्थल के आसपास लगे अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग से सुराग जुटाए जाते हैं।
करनेरा चौक की घटना में भी इसी तरह उपलब्ध डिजिटल और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर बाइक सवार की पहचान की जा सकती है।
पुलिस के पक्ष का इंतजार
छात्रा के पिता की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन पुलिस की तरफ से पूरे मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना भी जरूरी है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि पुलिस ने संबंधित सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लिया है या नहीं और उसमें बाइक का नंबर कितना स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
यह भी पता चलना बाकी है कि पुलिस ने आसपास के दूसरे कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली है या बाइक के हुलिए और मॉडल के आधार पर तलाश शुरू की है।
जांच से जुड़े इन तथ्यों के सामने आने के बाद ही पुलिस की कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
परिवार को कार्रवाई का इंतजार
छात्रा के पिता का कहना है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि दुर्घटना करने वाले बाइक सवार की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उनका आरोप है कि जांच का बोझ उन्हीं पर डालने के बजाय पुलिस को उपलब्ध सीसीटीवी और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचना चाहिए।
छह दिन बीत जाने के कारण परिवार की बेचैनी बढ़ रही है। अब उनकी नजर इस बात पर है कि पुलिस कब बाइक सवार की पहचान करती है।
फिलहाल करनेरा चौक पर छात्रा को टक्कर मारने का मामला पुलिस जांच और पीड़ित परिवार के आरोपों के कारण चर्चा में है। सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने के दावे के बीच बाइक सवार की पहचान नहीं हो पाना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आगे की जांच से ही पता चलेगा कि फुटेज से क्या सुराग मिलता है और दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बाइक चालक तक पुलिस कब पहुंचती है।





