Chandigarh: पीएम श्री स्कूलों के विकास में योगदान देंगे एचसीएस अधिकारी

चंडीगढ़: हरियाणा में कार्यरत एचसीएस कैडर के अधिकारी अब पीएम श्री स्कूलों को गोद लेंगे। एक अधिकारी के लिए कम से कम एक स्कूल को गोद लेना अनिवार्य होगा। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बुधवार को पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना की बैठक लेते हुए यह जानकारी दी। कोई अधिकारी अगर एक से अधिक स्कूल की निगरानी कर सकेगा तो उसके लिए भी इनकार नहीं किया जाएगा।
प्रदेश में योजना के विभिन्न चरणों के तहत कुल 250 पीएम श्री स्कूलों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में 124 जबकि दूसरे चरण में 111 स्कूलों को शामिल किया गया। तीसरे चरण में 6 और पांचवें चरण में 9 स्कूलों का चयन किया गया। इस तरह योजना के माध्यम से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को व्यापक रूप से शामिल किया गया है।
राज्य के 143 विकास खंडों में से 137 खंडों को इस योजना के अंतर्गत कवर किया जा चुका है। इस योजना के लिए वर्ष 2025-26 हेतु 191.69 करोड़ रुपये का अनुमोदित बजट है, जिसमें से 95.87 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और अब तक 29.78 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके है ।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक पीएम श्री स्कूल को बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए दो साल तक 2 करोड़ की राशि दी जाएगी। केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली इस राशि में 21 प्रमुख घटक कवर होंगे, जिनका उद्देश्य सरकारी स्कूलों को आधुनिक शिक्षा केंद्रों के तौर पर विकसित करना है।
इन स्कूलों की बुनियादी तथा शैक्षणिक जरूरतों का आकलन करने और कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्तों और अतिरिक्त उपायुक्तों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जाए। अनुराग रस्तोगी ने कहा कि इन स्कूलों में सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद प्राथमिकता आधार पर भरे जाएं। उन्होंने कहा कि पीएम श्री पहल सरकारी स्कूलों को आदर्श संस्थानों में बदलने और पूरे राज्य में शिक्षा की समग्र गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के तीन पीएम श्री स्कूलों और तीन मॉडल संस्कृति स्कूलों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान शैक्षणिक उत्कृष्टता, अवसंरचना विकास तथा नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के आधार पर दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि जिला और मंडल स्तर पर रचनात्मक तथा चयन समितियों का गठन किया जाए, जो स्कूलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर सर्वश्रेष्ठ संस्थानों का चयन करें।





