Chandigarh: नियमितीकरण पर सरकार का फोकस, विभागों से मांगी जानकारी

चंडीगढ़: सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने सभी विभागों से दो दिन के भीतर पिछले दस साल में स्थाई किए गए कर्मचारयों का ब्यौरा मांग लिया है। सरकार ने यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम योगेश त्यागी केस को लेकर की है। विभागाध्यक्षों को इसकी जानकारी 12 सितंबर तक भेजनी होगी।
मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 28 जुलाई 2025 को हुई पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से नवीनतम आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा था। इससे पहले 95 विभागों, बोर्डों और निगमों की रिपोर्ट महाधिवक्ता कार्यालय, चंडीगढ़ को भेजी जा चुकी है। अब अदालत ने दोबारा अपडेटेड डेटा मांगा है।
विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने पुराने आंकड़ों में कोई बदलाव है तो उसे अपडेट करें और तुरंत भेजें। जानकारी न होने की स्थिति में भी ‘शून्य सूचना’ अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। सभी विभागों को यह रिपोर्ट मानव संसाधन-१ शाखा को ई-मेल के माध्यम से भेजनी है। सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
अदालत से होने वाले किसी भी प्रतिकूल आदेश की जवाबदेही उसी विभाग/अधिकारी की होगी जिसने जानकारी देने में लापरवाही बरती।
सरकार की ओर से यह पत्र इसीलिए जारी किया है ताकि समय पर ताज़ा आंकड़े उपलब्ध हों और अदालत में सरकार की स्थिति मजबूत हो। नियमितीकरण नीति 2014 से जुड़े विवादित मुद्दों पर न्यायिक फैसला तेज़ी से आ सकेगा। साथ ही, विभागीय जवाबदेही तय होने से आगे लापरवाही पर अंकुश लगेगा।





