हरियाणा

भीख की जगह किताब, अनु ने बदली 20 हजार बच्चों की जिंदगी

nidhi
13 Oct 2026 9:56 AM IST
भीख की जगह किताब, अनु ने बदली 20 हजार बच्चों की जिंदगी
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हिसार: भीख मांगने और कूड़ा बीनने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए हरियाणा की अनु चिनिया लंबे समय से काम कर रही हैं। आपके दिए विवरण के अनुसार, उनकी पहल से 20 हजार बच्चों को लाभ मिला है। उनका अभियान उन बच्चों तक पहुंचने पर केंद्रित है, जो आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण स्कूल से दूर हैं। हालांकि, 20 हजार का ताजा आंकड़ा स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सका है।
अनु चिनिया हिसार के दुर्जनपुर की रहने वाली हैं। वर्ष 2024 में प्रकाशित विवरण के मुताबिक, उनकी संस्था ‘भीख नहीं किताब दो’ ने प्रदेश में 15 हजार से अधिक बच्चों का स्कूलों में दाखिला करवाया था। इनमें ऐसे बच्चे शामिल थे, जो सड़कों पर भीख मांगते थे या किसी कारण से विद्यालय नहीं जाते थे। संस्था का काम बच्चों की पहचान करने, उनके अभिभावकों को समझाने और उन्हें पढ़ाई से जोड़ने का रहा है।
इस अभियान की शुरुआत हिसार बस स्टैंड पर बच्चों को भीख मांगते देखने से हुई। अनु ने वर्ष 2013 में संस्था बनाई और झुग्गियों में जाकर परिवारों से संपर्क शुरू किया। हिसार के अलावा पंचकूला, फरीदाबाद, कैथल और सिरसा सहित कई जिलों में भी संस्था ने काम किया। वर्ष 2024 के विवरण में दो छात्राओं के कॉलेज तक पहुंचने का उल्लेख भी है। यह स्कूल से बाहर रहे बच्चों की आगे की पढ़ाई से जुड़ा एक उदाहरण है। बच्चों को पढ़ाने का शुरुआती रास्ता आसान नहीं था। वर्ष 2019 में प्रकाशित अनु के अनुभवों के अनुसार, उन्होंने सूर्यनगर की झुग्गी बस्ती से काम शुरू किया। कुछ परिवार बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार नहीं थे। उनके सामने रोज की कमाई और भोजन की चिंता थी। अनु नियमित रूप से बस्ती जातीं और पेड़ के नीचे जगह साफ कर चटाई बिछाकर बच्चों को पढ़ाती थीं।
धीरे-धीरे परिवारों का भरोसा बढ़ा और बच्चे आने लगे। अनु के मुताबिक, लगभग एक महीने में 70 से 80 बच्चे पढ़ाई से जुड़ गए। बाद में उन्हें बच्चों की नियमित पढ़ाई के लिए दूसरी जगह मिली और स्कूलों में नामांकन कराया गया। लेकिन दाखिले के बाद भी परेशानियां सामने आईं। स्कूलों से बच्चों के व्यवहार और साफ-सफाई को लेकर शिकायतें मिलीं। इसके बाद अनु ने करीब चार महीने तक उनके आचार-व्यवहार पर काम किया और फिर उन्हें विद्यालय भेजा।
उसी पुराने विवरण में भीख मांगने वाले एक बच्चे के दौड़ प्रतियोगिता में पहला स्थान पाने और कबाड़ चुनने वाले दूसरे बच्चे के पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने का उल्लेख है। ये उदाहरण बताते हैं कि अभियान में दाखिले के साथ बच्चों को स्कूल के वातावरण में ढालने पर भी ध्यान दिया गया। अनु की पहल का मुख्य विषय बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना है। दिए गए विवरण में भीख मांगने और कूड़ा बीनने वाले बच्चों के हाथों में कलम थमाने की बात कही गई है। ऐसी स्थिति में बच्चों की उपलब्धि को केवल उनकी पिछली परिस्थितियों से जोड़कर देखने के बजाय उनकी पढ़ाई और आगे की प्रगति के आधार पर समझना अधिक उचित है।
इस खबर में लाभान्वित बच्चों की संख्या और उनके जीवन में आए बदलाव को भी अलग-अलग समझना जरूरी है। शिक्षा से जुड़ने, स्कूल में दाखिला मिलने और नियमित पढ़ाई जारी रहने के अपने अलग अर्थ हैं। उपलब्ध पुराने विवरण संस्था द्वारा स्कूलों में दाखिले कराने और कुछ बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी देते हैं। वहीं, आपके दिए शीर्षक में संख्या 20 हजार बताई गई है। इस ताजा संख्या की पुष्टि के लिए संस्था का वर्तमान विवरण आवश्यक है। अनु चिनिया के काम की कहानी का केंद्र जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचना और उन्हें पढ़ाई का अवसर दिलाना है।
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