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एशियाई प्रतियोगिता में रजत जीतने की खबर
आगरा: उम्र के 76वें पड़ाव पर भी राधेश्याम गुप्ता का तैराकी के प्रति उत्साह बरकरार है। उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित द्वितीय एशियाई मास्टर्स तैराकी चैंपियनशिप में अपने आयु वर्ग की 200 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। रामबाग नुनिहाई निवासी राधेश्याम सेवानिवृत्त हेडमास्टर हैं। स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित प्रतियोगिता चार से दस अक्टूबर तक चली। इसमें आगरा के पांच तैराक शामिल हुए।
राधेश्याम की इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का अभ्यास है। उन्हें बचपन से तैराकी का शौक था और वर्ष 1988 से उन्होंने नियमित रूप से तैरना शुरू किया। नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी खेल से उनका जुड़ाव बना रहा। वे यमुना नदी में अभ्यास करते हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुके हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी राधेश्याम को सम्मान मिल चुका है। बेहतर शिक्षा प्रबंधन के लिए वर्ष 2012 में राज्यपाल ने उन्हें सम्मानित किया था। वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने तैराकी जारी रखी। अपने अनुभव से परिवार और आसपास के लोगों को भी प्रशिक्षण दिया। अब तक वे 50 लोगों को निशुल्क तैराकी सिखा चुके हैं। एशियाई प्रतियोगिता में उनके साथ पहुंचे मनीष सिंह, अमर अवस्थी, आरबी सिंह और प्रीति कटियार भी फाइनल तक पहुंचे। जिला तैराकी संघ के पदाधिकारियों ने खिलाड़ियों को बधाई दी।
बेंगलुरु की प्रतियोगिता से पहले आगरा के खिलाड़ियों ने हरियाणा के बहादुरगढ़ में अपनी प्रतिभा दिखाई थी। वहां 11 से 13 सितंबर तक 22वीं राष्ट्रीय मास्टर्स तैराकी चैंपियनशिप आयोजित हुई थी। आगरा से छह खिलाड़ियों ने अलग-अलग आयु वर्गों में हिस्सा लिया। इसी प्रतियोगिता के प्रदर्शन के आधार पर राधेश्याम गुप्ता सहित पांच तैराकों को एशियाई चैंपियनशिप में भाग लेने का अवसर मिला।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मनीष सिंह ने 40 से 44 वर्ष आयु वर्ग की 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धा में रजत पदक जीता था। वहीं आरबी सिंह ने 70 से 74 वर्ष आयु वर्ग की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। राधेश्याम गुप्ता, अमर अवस्थी और प्रीति कटियार ने भी अपने प्रदर्शन से एशियाई प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शीर्ष छह स्थान पाने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन को एशियाई चयन का आधार बनाया गया था। इस तरह बहादुरगढ़ में मिली सफलता के बाद आगरा के खिलाड़ियों ने बेंगलुरु में चुनौती पेश की और राधेश्याम ने रजत पदक अपने नाम किया।
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