हरियाणा
CM सैनी का बड़ा फैसला,प्राइवेट बिजली कंपनी के लाइसेंस पर रोक
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 8:59 PM IST

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पंचकूला। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) को नीतिगत निर्देश जारी किए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार ने आयोग से प्रदेश में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लागू करने, उसके आधार पर परिचालन शुरू करने या उसे प्रभावी बनाने की प्रक्रिया रोकने को कहा है। यह कदम गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच उठाया गया है।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी सरकार की ओर से धारा 108 का इस्तेमाल करने की घोषणा की थी। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की। सरकार का उद्देश्य विवाद का समाधान निकालने के साथ प्रदेश में बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखना है।
मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी हुए निर्देश
प्राप्त विवरण के मुताबिक, सरकार ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी के बाद हरियाणा विद्युत नियामक आयोग को निर्देश भेजे हैं।इन निर्देशों में प्रदेश में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लागू करने और उसके आधार पर परिचालन शुरू करने पर रोक लगाने की बात कही गई है।सरकार ने आयोग के सचिव को निर्देशों को आयोग के संज्ञान में लाने के लिए भी कहा है।हालांकि, निर्देश जारी किए जाने का विवरण सामने आया है, लेकिन इनका पूर्ण आधिकारिक पाठ और आयोग की ओर से की गई अंतिम कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण है कि सरकार के नीतिगत निर्देश और पहले जारी किए गए लाइसेंस का कानूनी रूप से निरस्त होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
क्या है विद्युत अधिनियम की धारा 108(1)?
विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) राज्य सरकार को सार्वजनिक हित से जुड़े नीतिगत मामलों में राज्य विद्युत नियामक आयोग को लिखित निर्देश देने का अधिकार प्रदान करती है।इस प्रावधान के अनुसार, आयोग को सार्वजनिक हित से संबंधित नीतिगत विषयों में राज्य सरकार के निर्देशों से मार्गदर्शन लेना होता है।हालांकि, विद्युत नियामक आयोग एक वैधानिक संस्था है और लाइसेंस संबंधी निर्णयों के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है।इसीलिए धारा 108 का उपयोग करने से पहले से जारी लाइसेंस स्वतः रद्द नहीं माना जा सकता।सरकार के निर्देशों का वास्तविक प्रभाव आयोग की आगे की कार्रवाई और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को मिला था लाइसेंस
विवाद की शुरुआत हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के 19 अक्टूबर 2026 के फैसले से हुई थी।आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 वर्ष के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया था।इस व्यवस्था के तहत निजी कंपनी को सरकारी बिजली वितरण निगम के साथ समानांतर रूप से बिजली वितरण सेवाएं उपलब्ध कराने की अनुमति मिल सकती थी।हरियाणा में फिलहाल दक्षिणी क्षेत्र में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम और उत्तरी क्षेत्र में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम प्रमुख सरकारी वितरण कंपनियां हैं।नए लाइसेंस के बाद गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा की संभावना पैदा हुई थी।
कर्मचारियों ने किया था तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान
निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त संघर्ष मोर्चे ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था।कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि समानांतर लाइसेंस की व्यवस्था से सरकारी बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।उनका कहना है कि निजी कंपनी को लाभकारी क्षेत्रों में बिजली वितरण का अवसर मिलने से सरकारी निगमों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।कर्मचारियों ने रोजगार सुरक्षा, सरकारी बिजली सेवाओं के भविष्य और उपभोक्ताओं के हितों को लेकर भी सवाल उठाए।इसी विरोध के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली सेवाएं प्रभावित हुईं।
बिजली कटौती से लोगों को हुई परेशानी
हड़ताल के दौरान गुरुग्राम, फरीदाबाद और प्रदेश के अन्य इलाकों से बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें सामने आईं।कई स्थानों पर बिजली की खराबियों को ठीक करने में देरी हुई।बिजली कटौती के कारण कुछ इलाकों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई, क्योंकि पानी की मोटर और पंप नहीं चल सके।स्थानीय लोगों ने बिजली आपूर्ति सामान्य करने की मांग उठाई।इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत तेज कर दी।
अनिल विज ने कर्मचारियों से की काम पर लौटने की अपील
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार सुबह पंचकूला में कहा कि सरकार कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है और सरकार धारा 108 का इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।विज ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने और बिजली सेवाएं सामान्य करने की अपील की।उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है।शुक्रवार दोपहर तीन बजे पंचकूला के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी निर्धारित की गई थी।
सरकार ने कानूनी चुनौती देने की भी बनाई योजना
समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के मामले में राज्य सरकार पहले ही कानूनी विकल्प अपनाने की बात कह चुकी है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आयोग के फैसले को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण यानी APTEL में चुनौती देने की घोषणा की थी।सरकार का कहना है कि वह बिजली कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है।ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आवश्यकता पड़ने पर कानूनी लड़ाई आगे तक ले जाने की बात भी कही थी।ऐसे में धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश देने के अलावा अपीलीय प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
निजी बिजली वितरण को लेकर दो अलग-अलग पक्ष
बिजली वितरण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है।कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इस व्यवस्था से सरकारी बिजली निगमों के हित प्रभावित हो सकते हैं।वहीं, कुछ उपभोक्ता संगठनों और आवासीय कल्याण संघों ने समानांतर बिजली वितरण का स्वागत किया है।उनका तर्क है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बिजली कनेक्शन मिलने में देरी कम हो सकती है और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध हो सकती हैं।हालांकि, निजी भागीदारी से उपभोक्ताओं को कितना लाभ मिलेगा, यह भविष्य में सेवा की गुणवत्ता, नियामकीय व्यवस्था और वास्तविक संचालन पर निर्भर करेगा।
अब आयोग की अगली कार्रवाई पर नजर
सरकार के नीतिगत निर्देशों के बाद हरियाणा विद्युत नियामक आयोग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।यह देखना होगा कि आयोग समानांतर लाइसेंस के कार्यान्वयन के संबंध में क्या निर्णय लेता है।इसके अलावा सरकार की ओर से संभावित अपील और कर्मचारी संगठनों के साथ हुए समझौते की शर्तें भी विवाद के भविष्य को प्रभावित करेंगी।राज्य सरकार के सामने बिजली कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान निकालने के साथ उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की चुनौती है।
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