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गुजरात में गोहत्या पर सख्त फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद

Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 11:33 PM IST
गुजरात में गोहत्या पर सख्त फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद
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गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर जिले की एक अदालत ने गोहत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कलोल की सत्र अदालत ने वसीम कुरैशी, मोहम्मद रफीक कुरैशी और अशफाक बहेलिम को गुजरात पशु संरक्षण कानून के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने तीनों पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला अगस्त 2024 में गांधीनगर जिले के जामला गांव में हुई कार्रवाई से जुड़ा है, जहां पुलिस ने छापेमारी के दौरान 277 किलोग्राम गोमांस और पशुओं के वध में इस्तेमाल होने वाले हथियार बरामद किए थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.आर. राजपूत ने सोमवार, 26 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए गाय के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का भी उल्लेख किया। अदालत ने अपने निर्णय में मनुस्मृति, वेदों और अन्य हिंदू धार्मिक ग्रंथों का हवाला दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 अगस्त 2024 को गांधीनगर जिले के जामला गांव में पुलिस को अवैध पशु वध से जुड़ी गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके आधार पर पुलिस टीम ने गांव के एक मकान पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में मांस मिला, जिसकी पहचान जांच के दौरान गोमांस के रूप में हुई। कुल 277 किलोग्राम गोमांस बरामद किया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 55 हजार रुपये बताई गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने पशुओं को काटने में इस्तेमाल होने वाले हथियार और मांस के परिवहन के लिए प्रयुक्त एक वाहन भी जब्त किया। इस मामले में शुरुआत में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले से जुड़े कुछ आरोपी ऐसे पशुओं की खरीद करते थे, जो कमजोर थे या दूध देना बंद कर चुके थे। आरोप था कि इसके बाद अन्य व्यक्तियों को बुलाकर पशुओं का अवैध रूप से वध कराया जाता था और मांस बेचकर आर्थिक लाभ कमाने की योजना बनाई जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि बरामद मांस को आगे बेचने की तैयारी थी। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के कारण संबंधित योजना पूरी नहीं हो सकी। अभियोजन पक्ष ने इन परिस्थितियों को अदालत के सामने रखते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 54 गवाहों और 18 दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के सामने प्रस्तुत किया। इनमें पुलिस कार्रवाई, बरामद सामग्री और जांच से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल थे। अदालत ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद तीन आरोपियों को दोषी पाया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.आर. राजपूत ने वसीम कुरैशी, मोहम्मद रफीक कुरैशी और अशफाक बहेलिम को गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम के तहत आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अतिरिक्त कानून की अन्य धाराओं के तहत तीनों को दस वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।
इस तरह प्रत्येक दोषी पर कुल तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। तीनों की कारावास संबंधी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने मामले में दो अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं, एक अन्य आरोपी की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।
अदालत का फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि न्यायाधीश ने अपने निर्णय में गाय के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने प्राचीन हिंदू ग्रंथ मनुस्मृति के साथ वेदों और अन्य धार्मिक ग्रंथों का संदर्भ दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि हिंदू धार्मिक परंपरा में गाय को विशेष सम्मान प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गाय को समृद्धि और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। अदालत ने मनुस्मृति के संदर्भ में पशुओं के संरक्षण और उनकी देखभाल के महत्व का भी उल्लेख किया।
फैसले में आर्ष विवाह की परंपरा का संदर्भ देते हुए गाय और बैल की जोड़ी के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया गया। इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कामधेनु और गोवंश से जुड़ी मान्यताओं का भी उल्लेख किया गया।
अदालत की इन टिप्पणियों को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, दोषियों को सजा गुजरात पशु संरक्षण कानून के प्रावधानों और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दी गई है।
गौरतलब है कि गुजरात में गोवंश संरक्षण को लेकर कड़े कानूनी प्रावधान लागू हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन किया था। इसके तहत गोहत्या के अपराध में सजा के प्रावधानों को और कठोर बनाया गया।
संशोधित कानून के अनुसार, गोहत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा गोमांस के अवैध परिवहन, भंडारण और बिक्री से संबंधित अपराधों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान है।
गुजरात सरकार ने इससे पहले वर्ष 2011 में भी कानून में संशोधन कर गोवंश संरक्षण से संबंधित प्रतिबंधों को मजबूत किया था। वर्ष 2017 में किए गए बदलावों के बाद राज्य में ऐसे मामलों के लिए और अधिक कठोर दंडात्मक व्यवस्था लागू हुई।
इस फैसले पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य में गोहत्या जैसे अपराधों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हर्ष संघवी ने गांधीनगर पुलिस और अभियोजन पक्ष की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि मामले में प्रभावी जांच और मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने से दोषियों को सजा दिलाने में सफलता मिली है।
उपमुख्यमंत्री ने गोवंश संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
वहीं, इस मामले में अदालत द्वारा दो आरोपियों को बरी किया जाना भी महत्वपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि अदालत ने सभी आरोपियों की भूमिका का अलग-अलग मूल्यांकन किया और जिनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध पाए गए, उन्हीं को दोषी ठहराया।
इस फैसले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों और दस्तावेजों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों को प्रमाणित करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। अदालत ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सजा निर्धारित की।
गांधीनगर जिले के जामला गांव में अगस्त 2024 में हुई पुलिस कार्रवाई से शुरू हुआ यह मामला करीब दो वर्ष बाद महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय तक पहुंचा है। तीन दोषियों को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर तीन लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
फिलहाल कलोल सत्र अदालत का यह फैसला गुजरात पशु संरक्षण कानून के कठोर प्रावधानों और उनके न्यायिक क्रियान्वयन को लेकर चर्चा में है। अदालत ने जहां तीन आरोपियों को दोषी ठहराया, वहीं दो अन्य को पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण बरी कर दिया। अब दोषियों के पास कानून के अनुसार उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध है।
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