Ramol पटाखा फैक्ट्री विस्फोट एसआईटी करेगी जांच, दो अन्य फैक्ट्रियां भी सील

Ahmedabad अहमदाबाद : गुजरात के अहमदाबाद शहर में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। वस्त्राल क्षेत्र के रामोल थाना अंतर्गत हुई इस दर्दनाक घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग प्रभावित हुए। हादसे के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घटना के 24 घंटे के भीतर ही अवैध पटाखा फैक्ट्री को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही आसपास संचालित दो अन्य बिना लाइसेंस वाली पटाखा फैक्ट्रियों को भी सील कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, रामोल इलाके में यह फैक्ट्री लंबे समय से अवैध तरीके से संचालित की जा रही थी। यहां पटाखों के निर्माण और भंडारण का काम बिना जरूरी अनुमति और सुरक्षा मानकों के किया जा रहा था। अचानक हुए विस्फोट में फैक्ट्री में मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को दी, जिसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।
हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने की बात कही गई है। वहीं, घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी सवाल उठाए हैं कि आखिर बिना अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था के इतनी बड़ी पटाखा फैक्ट्री कैसे संचालित होती रही।
हादसे के बाद अहमदाबाद पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी को घटना के कारणों, फैक्ट्री संचालन की वैधता, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है।
हालांकि, एसआईटी के गठन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस आयुक्त द्वारा बनाई गई जांच टीम में केवल पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस टीम में फायर विभाग, अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी), एस्टेट विभाग, जिला प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं की जांच में कई विभागों की भूमिका अहम होती है, क्योंकि फैक्ट्री संचालन, भवन अनुमति, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र और बिजली कनेक्शन जैसे कई पहलुओं की जांच जरूरी होती है।
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संबंधित विभागों के अधिकारी जांच टीम में शामिल होते तो अवैध फैक्ट्री के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच हो सकती थी। केवल पुलिस जांच से आपराधिक पहलुओं का पता लगाया जा सकता है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय जिम्मेदारी तय करने के लिए अन्य विभागों की भागीदारी भी जरूरी मानी जा रही है।
प्रशासन ने हादसे के बाद इलाके में चल रही अन्य पटाखा इकाइयों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जहां भी बिना लाइसेंस या नियमों के खिलाफ पटाखों का निर्माण या भंडारण पाया जाएगा, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर अवैध पटाखा फैक्ट्रियों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का मुद्दा सामने ला दिया है। हर साल देश के कई हिस्सों में पटाखा निर्माण के दौरान हादसे सामने आते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले से ही निगरानी और जांच व्यवस्था मजबूत करनी होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
अहमदाबाद हादसे की जांच अब एसआईटी के जिम्मे है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस अवैध फैक्ट्री को चलाने में किन लोगों की भूमिका थी और किन विभागों की लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ।





