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Ahmedabad अहमदाबाद। गुजरात में संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन जब मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने गुजरात की कमान संभाली थी, तब से इस परंपरा में नया ट्विस्ट आया। उन्होंने संक्रांति के मौके पर काइट फेस्टिवल (पतंग महोत्सव) शुरू कराया। पहले जहां इसमें कुछ लोग ही शामिल होते थे, वहीं अब यह अंतरराष्ट्रीय त्योहार बन चुका है। दुनिया भर से पतंगबाज गुजरात में इस फेस्टिवल में भाग लेने आते हैं।
पतंग महोत्सव के बढ़ते चलन के साथ ही पतंग बनाने का कारोबार भी खूब फल-फूल रहा है। इससे हजारों लोग अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। आज भी बाजार में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर छपी पतंगों की धूम है। इन पतंगों की मांग इतनी ज्यादा है कि अधिकांश पतंग निर्माता खासतौर पर पीएम मोदी तस्वीर से छपी पतंग ही बनाते हैं। इन पतंगों पर मोदी सरकार के कामों और विभिन्न सामाजिक संदेशों को उकेरा जाता है। 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ,' 'आत्मनिर्भर भारत,' और 'वन्दे मातरम' जैसे संदेश पतंगों पर छपते हैं और लोगों तक आसानी से पहुंचते हैं।
पीएम मोदी की तस्वीर छपी पतंगों की यह लोकप्रियता सिर्फ व्यापार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई पतंग निर्माता सामाजिक जन जागृति के संदेश भी पतंग के माध्यम से फैलाते हैं। इकबाल भाई बहेलिम ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि पतंग का कारोबार सालों से चलता रहा है, लेकिन पीएम मोदी द्वारा शुरू किए गए काइट फेस्टिवल के बाद यह व्यापार कई गुना बढ़ गया। अब पतंग बनाने का काम साल भर चलता है।
उन्होंने कहा कि पतंग पर छपाए जाने वाले संदेशों में कई सामाजिक और स्वास्थ्य संदेश भी होते हैं। पतंग निर्माता इन संदेशों को लोगों तक पहुंचाने का काम भी करते हैं। उन्होंने बताया कि पतंग के जरिए जन जागृति फैलाने का काम सिर्फ व्यवसायी ही नहीं कर रहे, बल्कि कई मानवतावादी परिवार और डॉक्टर भी इसमें सहयोग देते हैं। ये लोग अस्पताल, स्कूल और अन्य संस्थानों में पतंग मुफ्त बांटकर संदेश फैलाते हैं। ये लोग अपनी संस्था या परिवार के जरिए पतंग पर सामाजिक संदेश छपवाते हैं और लोगों में जागृति पैदा करते हैं।
पीएम मोदी की तस्वीर लगी पतंगों में सिर्फ सामाजिक संदेश ही नहीं हैं, बल्कि मोदी सरकार के विकास और प्रगति के काम भी उकेरे जाते हैं, जैसे भारत का चांद पर पहुंचना, हर घर तिरंगा, देश की उन्नति, प्रगति आदि। ये पतंग न सिर्फ बच्चों और युवाओं में उत्साह और जागृति पैदा करती हैं, बल्कि बड़े-बड़े व्यापारियों और आम लोगों के बीच भी बहुत लोकप्रिय हैं।
पतंग बनाने वाले नारायण भाई ने बताया कि वह 15 साल से पतंग का काम कर रहे हैं। पहले पेंट वाली पतंगें बनाई जाती थीं, लेकिन अब पीएम मोदी की तस्वीर छपी पतंग की मांग इतनी बढ़ गई है कि व्यवसाय कई गुना बढ़ गया है। इसी तरह, जिग्नेश बताते हैं कि ग्राहक अब सिर्फ मोदी छाप पतंग मांगते हैं। इसमें न सिर्फ पीएम मोदी की तस्वीरें होती हैं, बल्कि उनके काम और योजनाओं के संदेश भी छपे होते हैं।
उन्होंने बताया कि पतंग बाजार में ग्राहकों की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। लोग मोदी छाप पतंग खरीदते हैं, उड़ाते हैं, और कुछ पतंग दान में भी देते हैं। गरीब युवकों और बच्चों तक संदेश पहुंचाने का यह तरीका बेहद प्रभावशाली साबित हो रहा है।
पतंग महोत्सव की वजह से न सिर्फ व्यवसाय बढ़ा है, बल्कि गुजरात की पहचान भी और मजबूत हुई है। यह त्योहार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। देश-विदेश से लोग इस फेस्टिवल में भाग लेने आते हैं, पतंग उड़ाते हैं, और बाजार में नए-नए डिजाइन और संदेश वाली पतंगें खरीदते हैं।
इसके अलावा, पतंगों के माध्यम से लोग मानवता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के संदेश भी फैलाते हैं। जैसे इकबाल भाई बताते हैं कि अस्पताल, स्कूल और समाज सेवा संस्थाओं में पतंग वितरित कर लोगों तक जागृति फैलाई जाती है। यह एक तरह से समाज सेवा और व्यवसाय का मिश्रण बन चुका है।
गुजरात में महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, मोरारजी देसाई और पीएम नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं ने राज्य की कला, संस्कृति और प्रगति को नई दिशा दी है। पतंग महोत्सव भी इसी विकास और प्रगति का हिस्सा बन गया है। मोदी छाप पतंगें आज सिर्फ उड़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि देशभक्ति, विकास और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक बन गई हैं।
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