गुजरात

वडोदरा के वर्षों पुराने जमीन विवाद में नया मोड़, यूसुफ पठान को बड़ी राहत

nidhi
20 Oct 2026 7:23 AM IST
वडोदरा के वर्षों पुराने जमीन विवाद में नया मोड़, यूसुफ पठान को बड़ी राहत
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यूसुफ पठान को 978 वर्ग मीटर जमीन देने की मंजूरी

वडोदरा: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को गुजरात के वडोदरा में वर्षों से विवादित एक भूखंड के मामले में बड़ी राहत मिली है। गुजरात सरकार ने वडोदरा नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 978 वर्ग मीटर के प्लॉट को उन्हें आवंटित करने की मंजूरी दी है। यह जमीन तंडलजा इलाके में उनके पारिवारिक बंगले के पास स्थित है। हालांकि, राज्य सरकार की मंजूरी के बाद भी नगर निगम स्तर की प्रक्रिया और कुछ वित्तीय मुद्दों पर निर्णय बाकी है। इसलिए पूरे विवाद को पूरी तरह समाप्त हुआ नहीं माना जा सकता।

500 वर्ग मीटर जमीन उपहार में देने का प्रावधान
सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, कुल भूखंड में से 500 वर्ग मीटर जमीन पठान को आवासीय इस्तेमाल के लिए उपहार के रूप में दी जाएगी। बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन निर्धारित मूल्यांकन की 55 प्रतिशत दर पर हस्तांतरित करने का प्रावधान है। इसका अर्थ है कि पूरे 978 वर्ग मीटर भूखंड को निशुल्क देने का फैसला नहीं हुआ है। जमीन का एक हिस्सा उपहार के रूप में और दूसरा हिस्सा रियायती भुगतान पर देने की व्यवस्था है। संबंधित मूल्यांकन और शर्तों के आधार पर भुगतान की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
अगस्त में जारी हुआ था सरकारी आदेश
सामने आए विवरण के अनुसार, राज्य सरकार का मंजूरी संबंधी आदेश 13 अगस्त का है। यह आदेश 29 अगस्त को वडोदरा नगर निगम तक पहुंचा। इसके बाद 31 अगस्त को पठान ने गुजरात हाई कोर्ट में अपनी अपील वापस ले ली थी। नगर निगम के भूमि संपदा विभाग ने आवंटन का प्रस्ताव स्थायी समिति के एजेंडे में शामिल किया है। इस तरह अक्टूबर में सामने आया घटनाक्रम पहले जारी सरकारी मंजूरी को नगर निगम की प्रक्रिया में आगे बढ़ाने से संबंधित है। इसे केवल उसी दिन लिया गया नया फैसला समझना घटनाक्रम की सही समयरेखा नहीं होगी।
वर्ष 2012 से चली आ रही है जमीन की मांग
इस प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। तब यूसुफ पठान ने अपने घर से लगे नगर निगम के खाली भूखंड को सार्वजनिक नीलामी के बिना 99 साल की लीज पर देने का अनुरोध किया था। आवेदन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में सुरक्षा संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया था। उस समय नगर निगम की स्थायी समिति और सामान्य सभा ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। लेकिन सीधे आवंटन के लिए राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक थी। जून 2014 में राज्य के शहरी विकास विभाग ने प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके बाद जमीन पर कथित कब्जे और आवंटन के अधिकार को लेकर विवाद बना रहा।
2024 में मिला था अतिक्रमण का नोटिस
वडोदरा नगर निगम ने जून 2024 में पठान को कथित अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया था। यह कार्रवाई उनके पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद सामने आई थी। पठान ने उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। जमीन के मामले में उन्होंने अदालत का रुख किया। न्यायिक कार्यवाही के दौरान बिना अंतिम आवंटन प्रक्रिया पूरी हुए भूखंड के इस्तेमाल पर सवाल उठे। बाद में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भूमि आवंटन से संबंधित सरकारी नीति के तहत राहत मांगने का विषय भी सामने आया।
नीलामी और कब्जे को लेकर उठे थे सवाल
इस भूखंड की सार्वजनिक नीलामी की तैयारी भी हुई थी। इसके लिए 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर का मूल्यांकन प्रस्ताव सामने आया, जिससे पूरे भूखंड की अनुमानित कीमत लगभग 20.5 करोड़ रुपये बैठती थी। लेकिन जमीन पर कथित कब्जा होने के कारण नीलामी की प्रक्रिया पर आपत्तियां उठीं। नगर निगम की बैठक में मांग की गई थी कि पहले भूखंड को कब्जामुक्त कराया जाए, ताकि नीलामी में इच्छुक खरीदार स्पष्ट स्थिति में भाग ले सकें। आपत्तियों के बाद नीलामी संबंधी प्रस्ताव वापस लिया गया था। मौजूदा आवंटन प्रक्रिया इसी लंबे प्रशासनिक घटनाक्रम का अगला चरण है।
राजनीतिक बदलाव से जुड़ रही चर्चा
पठान का तृणमूल कांग्रेस से अलग होने का घटनाक्रम भी इस फैसले के संदर्भ में चर्चा में है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वह टीएमसी से अलग हुए सांसदों के उस समूह में शामिल थे, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय की घोषणा की थी। राजनीतिक बदलाव और जमीन आवंटन की मंजूरी को सीधे लेनदेन या ‘इनाम’ के रूप में स्थापित करने वाला प्रमाण सामने नहीं आया है। दोनों घटनाओं का समय राजनीतिक सवाल पैदा कर सकता है, लेकिन उससे अपने आप कारण और परिणाम का संबंध सिद्ध नहीं होता।
अभी किन विषयों पर फैसला बाकी है?
नगर निगम आयुक्त अरुण महेश बाबू के अनुसार, राज्य सरकार की मंजूरी मिल गई है, लेकिन विस्तृत शर्तों की समीक्षा और नगर निकाय की सामान्य स्वीकृति प्रक्रिया पूरी होनी है। प्रस्ताव स्थायी समिति और सामान्य सभा के अनुमोदन से गुजरेगा। सरकारी व्यवस्था में यह भी कहा गया है कि इस निर्णय को भविष्य के अन्य मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। कथित कब्जे की अवधि के शुल्क जैसे मुद्दे अलग विचाराधीन रह सकते हैं। ऐसे में पठान को आवंटन की मंजूरी से राहत जरूर मिली है, लेकिन अंतिम हस्तांतरण और संबंधित देनदारियों की स्पष्टता आगे की प्रक्रिया से होगी।
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