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गुजरात में खेती को नई ताकत 50 करोड़ की योजना तैयार

Ratna Netam
9 Oct 2026 3:36 PM IST
गुजरात में खेती को नई ताकत 50 करोड़ की योजना तैयार
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गांधीनगर। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अस्थिरता के कारण वैश्विक उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था के सामने पैदा हुई चुनौतियों के बीच गुजरात सरकार कृषि क्षेत्र में जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार बायो-फर्टिलाइज़र और बायो-पेस्टिसाइड के उत्पादन तथा विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एक एकीकृत बायो-मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम स्थापित करने की योजना बना रही है। इस प्रस्तावित परियोजना पर अगले पांच वर्षों में लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सूचना निदेशालय ने शुक्रवार को बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक उर्वरक आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों को उजागर किया है। ऐसे में घरेलू स्तर पर कृषि से जुड़े आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो गया है। इसी उद्देश्य से गुजरात सरकार पारंपरिक कृषि-इनपुट पर निर्भरता कम करने और जैव प्रौद्योगिकी आधारित विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
पांच वर्षों में 50 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना
गुजरात सरकार की इस पहल को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।प्रस्तावित योजना के तहत लगभग 50 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पांच वर्षों में एकीकृत बायो-मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।इस पहल का उद्देश्य बायो-फर्टिलाइज़र और बायो-पेस्टिसाइड के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उत्पादन संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देकर पारंपरिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।हालांकि, प्रस्तावित परियोजना के लिए भूमि, निर्माण कार्य, उत्पादन इकाइयों और बजट आवंटन का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष से उर्वरक आपूर्ति पर चिंता
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अस्थिरता ने वैश्विक उर्वरक आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियों को सामने लाया है।कृषि उत्पादन में उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके उत्पादन और वितरण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था में बाधा आने पर विभिन्न देशों के कृषि क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।विशेष रूप से उन देशों के लिए ऐसी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, जो कृषि से संबंधित कुछ आवश्यक संसाधनों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर रहते हैं।इसी पृष्ठभूमि में गुजरात सरकार घरेलू स्तर पर कृषि-इनपुट की उपलब्धता मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।विभाग ने इस बात पर जोर दिया है कि कृषि क्षेत्र में वैकल्पिक तकनीकों और स्थानीय उत्पादन क्षमता का विकास भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सहायक हो सकता है।
बायो-फर्टिलाइज़र को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित योजना में बायो-फर्टिलाइज़र यानी जैव उर्वरकों के विकास और उत्पादन को प्रमुखता दी गई है।बायो-फर्टिलाइज़र ऐसे उत्पाद होते हैं, जिनमें लाभकारी सूक्ष्मजीव शामिल हो सकते हैं। ये सूक्ष्मजीव पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने की प्राकृतिक प्रक्रियाओं में सहायता करते हैं।कुछ जैव उर्वरक मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण या फॉस्फोरस की उपलब्धता बढ़ाने जैसी प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं।इनका प्रभाव फसल, मिट्टी की स्थिति, जलवायु और उत्पाद की गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करता है।इसलिए जैव उर्वरकों को सभी परिस्थितियों में रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण विकल्प नहीं माना जा सकता। हालांकि, उपयुक्त कृषि पद्धतियों के साथ इनके इस्तेमाल से पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।गुजरात सरकार की प्रस्तावित पहल का उद्देश्य इसी क्षेत्र में तकनीकी विकास और उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
जैव कीटनाशकों के उत्पादन पर भी जोर
बायो-फर्टिलाइज़र के साथ बायो-पेस्टिसाइड यानी जैव कीटनाशकों को भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।जैव कीटनाशक ऐसे उत्पाद होते हैं, जिनमें सूक्ष्मजीवों, प्राकृतिक पदार्थों या जैविक प्रक्रियाओं पर आधारित कीट नियंत्रण के उपाय शामिल हो सकते हैं।इनका उपयोग कृषि में कीटों और कुछ रोगों के प्रबंधन के लिए किया जाता है।जैव कीटनाशकों का प्रभाव संबंधित कीट, फसल, मौसम और इस्तेमाल की विधि पर निर्भर करता है।इन उत्पादों को बढ़ावा देने का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उपलब्ध कीट प्रबंधन विकल्पों का विस्तार करना और पारंपरिक रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता कम करना है।हालांकि, जैव कीटनाशकों का सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण तथा निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक होता है।
नवाचार और जैव प्रौद्योगिकी को मिलेगा प्रोत्साहन
गुजरात सरकार की प्रस्तावित योजना में नवाचार को बढ़ावा देना भी प्रमुख उद्देश्य है।विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन इस इकोसिस्टम के विकास पर काम कर रहा है।बायो-मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अनुसंधान, तकनीकी विकास और उत्पादन प्रक्रियाओं के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होता है।ऐसी व्यवस्था में प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को व्यावहारिक उत्पादन तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सुविधाओं और प्रक्रियाओं पर ध्यान दिया जाता है।प्रस्तावित इकोसिस्टम का उद्देश्य कृषि से संबंधित जैविक उत्पादों के विकास और उत्पादन को एक व्यवस्थित ढांचे के अंतर्गत प्रोत्साहित करना है।हालांकि, इस परियोजना में किन अनुसंधान संस्थानों, कंपनियों या स्टार्टअप को शामिल किया जाएगा, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
पारंपरिक कृषि-इनपुट पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
गुजरात सरकार की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक कृषि-इनपुट पर निर्भरता कम करना है।कृषि क्षेत्र में उर्वरक और कीटनाशक महत्वपूर्ण संसाधन हैं। इनके उपयोग से फसलों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं और कीट प्रबंधन में सहायता मिलती है।हालांकि, किसी एक प्रकार के कृषि संसाधन पर अत्यधिक निर्भरता आपूर्ति संबंधी समस्याओं के समय चुनौती बन सकती है।इसी कारण कृषि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के उत्पादों और तकनीकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों के विकास से किसानों के पास अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।हालांकि, प्रस्तावित योजना से किसानों की लागत में कितनी कमी आएगी या उत्पादन में कितना बदलाव होगा, इस संबंध में कोई आधिकारिक अनुमान नहीं दिया गया है।
घरेलू कृषि-इनपुट सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में उत्पन्न चुनौतियों के संदर्भ में घरेलू कृषि-इनपुट सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता बताई है।घरेलू स्तर पर कृषि संबंधी उत्पादों की उत्पादन क्षमता विकसित होने से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के प्रभाव को सीमित करने में मदद मिल सकती है।गुजरात सरकार इसी दिशा में जैव प्रौद्योगिकी आधारित कृषि उत्पादों के लिए एक संगठित व्यवस्था तैयार करने की योजना बना रही है।इसमें बायो-फर्टिलाइज़र, बायो-पेस्टिसाइड और संबंधित तकनीकी नवाचारों को प्राथमिकता दी जा रही है।
परियोजना के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में प्रस्तावित इस पहल को गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन द्वारा विकसित किया जा रहा है।पांच वर्षों में लगभग 50 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह योजना राज्य में कृषि जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।हालांकि, परियोजना कब शुरू होगी, उत्पादन सुविधाएं कहां स्थापित की जाएंगी और किसानों तक इन उत्पादों की उपलब्धता किस व्यवस्था के तहत सुनिश्चित की जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।फिलहाल गुजरात सरकार की यह पहल वैश्विक उर्वरक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के बीच घरेलू कृषि संसाधनों के विकास और जैव प्रौद्योगिकी आधारित विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रस्तावित कदम है।
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