गुजरात

गुजरात हाईकोर्ट ने 13 साल के लड़के के साथ आप्रकृतिक यौन संबंध बनाने वाले 16 साल के आरोपी को दी जमानत, रखी ये शर्त

Renuka Sahu
1 Jun 2022 4:36 AM GMT
Gujarat High Court grants bail to 16-year-old accused of having unnatural sex with 13-year-old boy
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फाइल फोटो 

गुजरात हाईकोर्ट ने करीब 13 साल के नाबालिग लड़के के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोपी 16 साल के लड़के को जमानत दे दी है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने करीब 13 साल के नाबालिग लड़के के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोपी 16 साल के लड़के को जमानत दे दी है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (Juvenile Justice Act) की धारा 12 को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति समीर दवे की खंडपीठ ने आरोपी को उस सोसायटी में प्रवेश करने से रोकते हुए जमानत दे दी, जहां पीड़ित रहता है. ऐसा करते हुए बेंच ने जुवेनाइन जस्टिस एक्ट की धारा 12 के तहत दायर आपराधिक पुनरीक्षण आवेदन को जमानत से इनकार करते हुए सत्र न्यायालय द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की अनुमति दी. धारा 12 में प्रावधान है कि जब किसी बच्चे को कथित रुप से कोई अपराध करने के लिए पकड़ा जाता है, तो उसे जमानत (Bail) के साथ या बिना जमानत पर रिहा किया जाएगा या किसी परिवीक्षा अधिकारी की देखरेख में या किसी व्यक्ति की देखरेख में रखा जाएगा.

मामले में 16 साल 8 महीने की उम्र के आवेदक पर आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता के नाबालिग बेटे, जिसकी उम्र 13 साल है, को छत पर ले जाकर जबरन व्यभिचार किया. घटना के बारे में किसी को बताने पर उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी. इसके अनुसार भारतीय दंड संहिता और यू/एस की धारा 377, 323, 506 (1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. आवेदक को अप्रैल 2022 में गिरफ्तार किया गया और बाल निरीक्षण गृह भेज दिया गया.
झूठे आरोप में फंसाया गया!
आवेदक ने दावा किया कि वो घटना के समय एक किशोर था, जिसे वर्तमान घटना में झूठे आरोप में फंसाया गया था. इसके अलावा वह अपनी विधवा मां के साथ रह रहा था और अगले शैक्षणिक साल में पढ़ाई शुरू करना चाहता था. उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और इसलिए आग्रह किया कि आवेदन की अनुमति दी जाए.
शर्तों के साथ मिली रिहाई
एपीपी ने आवेदक की दलीलों पर कड़ी आपत्ति जताई और आवेदन को खारिज करने की मांग की. पक्षकारों द्वारा दी गई दलीलों के साथ-साथ आरोपी की उम्र को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आवेदन को अनुमति देना उचित समझा और शर्तों के साथ नियमित जमानत पर उसकी रिहाई का आदेश दिया.
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