गुजरात
राजकोट में फर्जी डॉक्टरों का भंडाफोड़, बिना डिग्री चला रहे थे क्लिनिक,17 गिरफ्तार
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 11:11 PM IST

x
राजकोट। गुजरात के राजकोट जिले में पुलिस ने फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री और वैध लाइसेंस के क्लीनिक चलाने तथा मरीजों का इलाज करने का आरोप है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में से 14 की पढ़ाई केवल 10वीं, 11वीं या 12वीं कक्षा तक हुई है। बाकी तीन आरोपी सामान्य स्नातक हैं, लेकिन उनके पास भी एलोपैथिक चिकित्सा करने की आवश्यक योग्यता नहीं थी।
राजकोट ग्रामीण पुलिस ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को विशेष अभियान चलाकर इन आरोपियों को पकड़ा। शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर ने कार्रवाई की जानकारी दी। जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी कई वर्षों से डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। पुलिस ने इनके ठिकानों से दवाइयां, इंजेक्शन और चिकित्सा उपकरण सहित कुल 3,05,229 रुपये की सामग्री जब्त की है।
17 में से 14 के पास मेडिकल डिग्री नहीं, पढ़ाई भी अधूरी
पुलिस की जांच में आरोपियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
राजकोट ग्रामीण पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर के अनुसार, गिरफ्तार 17 आरोपियों में तीन ने केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।वहीं, आठ आरोपियों ने बारहवीं और तीन ने ग्यारहवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है।इसके अलावा तीन आरोपी स्नातक हैं। हालांकि, उनके पास भी चिकित्सा करने के लिए आवश्यक मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री नहीं थी।पुलिस के मुताबिक, ये लोग खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों को एलोपैथिक दवाएं देते थे।यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बिना आवश्यक चिकित्सा प्रशिक्षण के मरीजों का इलाज करना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
डॉक्टरों के सहायक बनकर सीखा काम
जांच में यह भी सामने आया कि कई आरोपी पहले अस्पतालों, निजी क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर में काम कर चुके थे।कुछ लोगों ने डॉक्टरों के सहायक के रूप में काम किया था।इसी दौरान उन्हें दवाओं और सामान्य बीमारियों से संबंधित सीमित जानकारी मिली।आरोप है कि बाद में इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने अपने क्लीनिक खोल लिए और मरीजों का इलाज शुरू कर दिया।पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी डॉक्टर के साथ काम करने या मेडिकल स्टोर में नौकरी करने से कोई व्यक्ति स्वतंत्र रूप से चिकित्सा करने के लिए योग्य नहीं हो जाता।इसके लिए निर्धारित चिकित्सा शिक्षा, मान्यता प्राप्त योग्यता और आवश्यक पंजीकरण होना जरूरी है।
25 साल से इलाज कर रहे थे कुछ आरोपी
इस कार्रवाई में सबसे गंभीर खुलासा आरोपियों द्वारा लंबे समय से मरीजों का इलाज किए जाने को लेकर हुआ है।पुलिस जांच के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में कुछ ने लगभग चार महीने पहले क्लीनिक शुरू किए थे, जबकि कुछ आरोपी 25 वर्षों तक बिना वैध मेडिकल योग्यता के चिकित्सा कार्य करते रहे।जानकारी के अनुसार, रफीक गराना नामक आरोपी करीब 25 वर्षों से क्लीनिक चला रहा था।वहीं, हरिप्रसाद जानी के लगभग 20 वर्षों से मरीजों का इलाज करने की बात सामने आई है।अन्य आरोपियों के क्लीनिक चलाने की अवधि चार महीने से लेकर कई वर्षों तक बताई गई है।अब जांच का विषय है कि ये लोग इतने लंबे समय तक संबंधित चिकित्सा योग्यता के बिना कैसे काम करते रहे।
बुखार और सर्दी के मरीजों को देते थे इंजेक्शन
पुलिस के अनुसार, आरोपी सामान्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों का इलाज करते थे।इनमें बुखार, सर्दी, खांसी और अन्य आम स्वास्थ्य समस्याएं शामिल थीं।जांच के दौरान सामने आया कि कई आरोपियों के क्लीनिकों में एलोपैथिक दवाओं के साथ इंजेक्शन, एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड भी मौजूद थे।इन दवाओं का गलत इस्तेमाल मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, बिना उचित जांच और चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक का उपयोग दवा प्रतिरोध की समस्या बढ़ा सकता है।इसी तरह स्टेरॉयड और इंजेक्शन का अनुचित इस्तेमाल कई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकता है।
ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे थे क्लीनिक
पुलिस ने राजकोट जिले के कई ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में छापेमारी की।इनमें पाटनवाव, जसदान, जेतपुर तालुका, शापर-वेरावल, कोटडा सांगाणी, मेटोडा जीआईडीसी, पडधारी, गोंडल तालुका और जेतपुर शहर सहित कई इलाके शामिल हैं।इन स्थानों पर आरोपी बिना आवश्यक मेडिकल योग्यता के क्लीनिक संचालित कर रहे थे।पुलिस की विशेष टीमों ने विभिन्न स्थानों पर जांच करके संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों और चिकित्सा सामग्री की पड़ताल की।वैध योग्यता से संबंधित दस्तावेज नहीं मिलने और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई।
तीन लाख से ज्यादा की दवाइयां और उपकरण जब्त
राजकोट पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के क्लीनिकों से विभिन्न प्रकार की दवाइयां और चिकित्सा उपकरण जब्त किए हैं।जब्त सामग्री में एलोपैथिक दवाएं, एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड, इंजेक्शन और अन्य चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।पुलिस के अनुसार, बरामद सामान की कुल कीमत 3 लाख 5 हजार 229 रुपये आंकी गई है।यह सामग्री आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दवाओं की खरीद कहां से की जाती थी और आरोपियों के पास इनके इस्तेमाल के लिए आवश्यक अनुमति थी या नहीं।
कुछ संदिग्ध पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही फरार
विशेष अभियान के दौरान पुलिस को अन्य संदिग्ध लोगों के बारे में भी जानकारी मिली।हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले कुछ लोग अपने क्लीनिक बंद करके फरार हो गए।
राजकोट ग्रामीण पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर ने बताया कि ऐसे व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।उन्होंने कहा कि बिना वैध योग्यता के चिकित्सा करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।पुलिस की कोशिश है कि जिले में ऐसे सभी व्यक्तियों का पता लगाया जाए, जो आवश्यक चिकित्सा अनुमति के बिना मरीजों का उपचार कर रहे हैं।मेडिकल प्रैक्टिशनर्स अधिनियम के तहत मामला दर्जपुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मेडिकल प्रैक्टिशनर्स अधिनियम की धारा 30 के तहत मामले दर्ज किए हैं।आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।हालांकि, गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की दोषसिद्धि का अंतिम फैसला अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता मिलने पर अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है।
मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल
एक ही जिले में 17 कथित फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।विशेष रूप से ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए योग्य चिकित्सकों तक पहुंच महत्वपूर्ण मुद्दा है।जब मरीज किसी क्लीनिक में इलाज कराने जाते हैं, तो उन्हें भरोसा होता है कि उनका उपचार प्रशिक्षित और अधिकृत चिकित्सक कर रहा है।लेकिन आवश्यक योग्यता के बिना इलाज करने वाले व्यक्तियों के कारण गलत दवा, गलत निदान और उपचार में देरी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।ऐसी परिस्थितियों में गंभीर बीमारी वाले मरीजों की स्थिति बिगड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है।
इलाज से पहले डॉक्टर की योग्यता जांचना जरूरी
स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि मरीज इलाज कराने से पहले चिकित्सक की योग्यता और पंजीकरण की जानकारी जरूर लें।जरूरत पड़ने पर संबंधित मेडिकल काउंसिल के पंजीकरण रिकॉर्ड से जानकारी सत्यापित की जा सकती है।गंभीर बीमारी, लगातार बुखार या किसी आपात स्थिति में मान्यता प्राप्त अस्पताल और पंजीकृत चिकित्सक से ही उपचार लेना चाहिए।बिना उचित चिकित्सकीय सलाह के इंजेक्शन, स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
Next Story





