गुजरात

खेती में ड्रोन तकनीक से किसानों को बड़ी राहत

Ratna Netam
12 Oct 2026 3:21 PM IST
खेती में ड्रोन तकनीक से किसानों को बड़ी राहत
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वडोदरा। गुजरात के वडोदरा जिले में आधुनिक कृषि तकनीक किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है। खेती में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से फसलों पर खाद और अन्य कृषि उत्पादों का छिड़काव पहले की तुलना में आसान और तेज हो गया है। विशेष रूप से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे कृषि उत्पादों के छिड़काव में ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे किसानों का समय बच रहा है और उन्हें खेतों में भारी स्प्रे मशीनें लेकर घूमने की आवश्यकता भी कम हो रही है। स्थानीय किसानों के अनुसार, ड्रोन की मदद से महज पांच मिनट में एक एकड़ खेत में छिड़काव किया जा सकता है।वडोदरा जिले में किसान खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक को भी अपना रहे हैं। ड्रोन से छिड़काव की सुविधा किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है। इस तकनीक के जरिए कम समय में बड़े क्षेत्र में स्प्रे किया जा सकता है। इससे खेती से जुड़े कार्यों में लगने वाली शारीरिक मेहनत कम होती है और किसानों को अन्य कृषि गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल सकता है।
पांच मिनट में एक एकड़ खेत में छिड़काव
वडोदरा जिले के किसान रश्मिकभाई बिनुभाई पटेल ने ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को लेकर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि ड्रोन से फसलों पर छिड़काव करने के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।रश्मिकभाई पटेल ने कहा, "ड्रोन से स्प्रे करने पर बहुत अच्छे नतीजे मिलते हैं, क्योंकि स्प्रे खेत के हर हिस्से तक पहुंचता है। सिर्फ पांच मिनट में एक एकड़ जमीन पर स्प्रे किया जा सकता है। इसके नतीजे बहुत अच्छे होते हैं और इससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है।"किसान के इस अनुभव से पता चलता है कि ड्रोन तकनीक खेतों में छिड़काव की प्रक्रिया को तेज बनाने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक समय खेत के आकार, ड्रोन की क्षमता, फसल और छिड़काव की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
भारी स्प्रे मशीनों से किसानों को मिलेगी राहत
पारंपरिक तरीके से फसलों पर छिड़काव करने के लिए किसानों को कई बार स्प्रे मशीन लेकर खेतों में चलना पड़ता है। इस प्रक्रिया में समय और शारीरिक मेहनत दोनों लगते हैं।विशेष रूप से बड़े खेतों में छिड़काव का काम अधिक श्रम वाला हो सकता है। ड्रोन तकनीक इस समस्या को कम करने में मदद कर रही है।ड्रोन की मदद से किसान बिना भारी स्प्रे मशीन लेकर खेत में घूमे फसलों पर छिड़काव करवा सकते हैं। इससे कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक हो सकता है।वडोदरा के किसानों के बीच इस तकनीक को अपनाने की बढ़ती रुचि के पीछे समय की बचत और कम शारीरिक मेहनत जैसे कारण बताए जा रहे हैं।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव में मददगार
खेती में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे कृषि उत्पादों के छिड़काव के लिए भी किया जा रहा है।नैनो यूरिया और नैनो डीएपी ऐसे उर्वरक उत्पाद हैं, जिनका उपयोग निर्धारित कृषि सलाह और उत्पाद निर्देशों के अनुसार किया जाता है। इनके छिड़काव में सही मात्रा, उचित समय और फसल की आवश्यकता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है।ड्रोन के माध्यम से इन उत्पादों का छिड़काव करने से किसानों को खेत के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है।हालांकि, किसी भी उर्वरक का उपयोग करते समय निर्धारित मात्रा और कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन आवश्यक है। ड्रोन का इस्तेमाल अपने आप में बेहतर पैदावार की गारंटी नहीं देता, लेकिन उचित संचालन के साथ यह छिड़काव की प्रक्रिया को सुविधाजनक बना सकता है।
खेती के काम में समय की हो रही बचत
किसानों के लिए खेती के विभिन्न कार्य समय पर पूरे करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और फसल की देखभाल जैसे काम निर्धारित समय पर किए जाते हैं।ऐसे में छिड़काव की प्रक्रिया में समय बचने से किसानों को अन्य कृषि गतिविधियों पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।वडोदरा जिले में ड्रोन तकनीक का उपयोग करने वाले किसानों का कहना है कि इससे कम समय में खेतों में स्प्रे किया जा सकता है।किसान रश्मिकभाई पटेल ने भी बताया कि ड्रोन से छिड़काव करने पर समय के साथ पैसे की बचत होती है। हालांकि, वास्तविक लागत में बचत ड्रोन सेवा के शुल्क, खेत के क्षेत्रफल और पारंपरिक छिड़काव की लागत पर निर्भर करेगी।
किसानों के बीच बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल
वडोदरा जिले में किसानों के बीच कृषि ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक के प्रति किसानों की रुचि का एक प्रमुख कारण खेती के काम को कम समय और कम मेहनत में पूरा करने की सुविधा है।ड्रोन की सहायता से खेत के ऊपर से छिड़काव किया जाता है। इससे किसानों को फसल की कतारों के बीच भारी उपकरण लेकर चलने की आवश्यकता कम पड़ती है।यह सुविधा उन परिस्थितियों में भी उपयोगी हो सकती है, जहां खेत में पैदल जाकर छिड़काव करना कठिन हो।हालांकि, ड्रोन के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित संचालन, मौसम की अनुकूल परिस्थितियां और संबंधित नियमों का पालन आवश्यक है।
आधुनिक तकनीक से बदल रहा खेती का तरीका
कृषि क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। ड्रोन जैसी आधुनिक प्रणालियां खेती के कुछ कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायता कर रही हैं।वडोदरा जिले में ड्रोन से छिड़काव का बढ़ता उपयोग इसी बदलाव का उदाहरण है। किसान पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीकों का इस्तेमाल कर अपने काम को आसान बनाने का प्रयास कर रहे हैं।ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों पर छिड़काव के लिए लगने वाली शारीरिक मेहनत को कम किया जा सकता है। इसके अलावा बड़े खेतों में काम की गति बढ़ाने में भी यह उपयोगी हो सकती है।इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए किसानों को इसके सही इस्तेमाल और सुरक्षा संबंधी सावधानियों की जानकारी होना जरूरी है।
किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही नई व्यवस्था
वडोदरा जिले के किसान रश्मिकभाई बिनुभाई पटेल का अनुभव बताता है कि ड्रोन तकनीक से फसलों पर छिड़काव करने में सुविधा मिल रही है। उनके अनुसार, पांच मिनट में एक एकड़ खेत में स्प्रे करने की क्षमता इस तकनीक को उपयोगी बनाती है।ड्रोन की मदद से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे कृषि उत्पादों के छिड़काव में समय बचाने और शारीरिक मेहनत कम करने की संभावना है।किसानों के बीच इस तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल आधुनिक कृषि उपकरणों के प्रति रुचि को दर्शाता है। हालांकि, ड्रोन की वास्तविक उपयोगिता और आर्थिक लाभ अलग-अलग कृषि परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।फिलहाल वडोदरा जिले में ड्रोन तकनीक किसानों के लिए खेती के काम को आसान बनाने का एक नया माध्यम बनकर सामने आई है। इसके जरिए फसलों पर छिड़काव की प्रक्रिया तेज होने के साथ किसानों को समय और श्रम की बचत का लाभ मिल रहा है।
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