गुजरात

विजयादशमी पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने की शस्त्र पूजा

Ratna Netam
20 Oct 2026 2:23 PM IST
विजयादशमी पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने की शस्त्र पूजा
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गांधीनगर। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विजयादशमी के पावन अवसर पर गांधीनगर स्थित अपने आधिकारिक आवास पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजा की। भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखने वाली इस परंपरा का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने आवास की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने सभी सुरक्षाकर्मियों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया।आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विजयादशमी के अवसर पर भारतीय संस्कृति की प्राचीन शस्त्र पूजन परंपरा का पालन किया। विजयादशमी का त्योहार असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शस्त्रों की पूजा करने की परंपरा भारतीय समाज में सदियों से चली आ रही है।
मुख्यमंत्री आवास पर हुआ पारंपरिक शस्त्र पूजन
गांधीनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास परिसर में आयोजित शस्त्र पूजा के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सुरक्षा व्यवस्था में उपयोग किए जाने वाले हथियारों की पूजा की। इस परंपरा के माध्यम से समाज की सुरक्षा, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म की रक्षा के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।भारतीय परंपरा में शस्त्रों को केवल युद्ध या शक्ति प्रदर्शन का साधन नहीं माना जाता, बल्कि इन्हें सुरक्षा, अनुशासन और न्याय की रक्षा का प्रतीक भी समझा जाता है। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन इसी भावना से जुड़ा हुआ है।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने आवास की सुरक्षा में तैनात जवानों को शुभकामनाएं दीं। सुरक्षाकर्मी महत्वपूर्ण व्यक्तियों और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में विजयादशमी के अवसर पर उनके उपयोग में आने वाले हथियारों की पूजा करना इस परंपरा का विशेष हिस्सा रहा।
शस्त्र और शास्त्र दोनों की रक्षा का संदेश
विजयादशमी के अवसर पर की जाने वाली शस्त्र पूजा भारतीय संस्कृति के उस विचार को दर्शाती है, जिसमें शस्त्र और शास्त्र दोनों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। शस्त्र जहां सुरक्षा, साहस और शक्ति का प्रतीक हैं, वहीं शास्त्र ज्ञान, विवेक और नैतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।भारतीय सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार, समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए शक्ति के साथ ज्ञान का होना भी आवश्यक है। शक्ति का उपयोग न्याय और सुरक्षा के लिए किया जाए तथा ज्ञान के माध्यम से सही और गलत के बीच अंतर समझा जाए, यही इस परंपरा का मूल संदेश है।मुख्यमंत्री द्वारा की गई शस्त्र पूजा को इसी सांस्कृतिक भावना से जोड़कर देखा जा रहा है। यह आयोजन भारतीय परंपराओं के संरक्षण और उनके सामाजिक महत्व को सामने लाने का अवसर भी बना।
विजयादशमी का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व
विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे दशहरा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। वहीं, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की मान्यता भी इस पर्व से जुड़ी हुई है।देश के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी को विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कई स्थानों पर रावण दहन किया जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में शस्त्र पूजा, वाहन पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है।विशेष रूप से सुरक्षा बलों और पारंपरिक संस्थानों में विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा का विशेष महत्व होता है। यह परंपरा कर्तव्य के प्रति समर्पण और समाज की रक्षा के संकल्प से जुड़ी मानी जाती है।
सुरक्षाकर्मियों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं
शस्त्र पूजन के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने आवास पर तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। इस आयोजन ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े जवानों के कर्तव्य और जिम्मेदारियों के महत्व को भी रेखांकित किया।विजयादशमी का पर्व लोगों को नकारात्मक विचारों और बुराइयों को त्यागकर सत्य, न्याय और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने अपने विजयादशमी संदेश में भी सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और एकता की भावना को मजबूत करने की कामना की है।
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