
वडोदरा। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से बड़ी राहत मिली है। वडोदरा में लंबे समय से विवादों में फंसी करोड़ों रुपये की जमीन के आवंटन को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। करीब 20.53 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाले 978 वर्गमीटर के प्लॉट में से 500 वर्गमीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय उपयोग के लिए उपहार के रूप में दी जाएगी। जबकि बाकी 478 वर्गमीटर जमीन रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब यूसुफ पठान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो चुके हैं। सरकार के इस फैसले से राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आवंटन की औपचारिक प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।
978 वर्गमीटर जमीन का विवाद सुलझाने की पहल
गुजरात के वडोदरा शहर के तांदलजा इलाके में स्थित यह जमीन लंबे समय से विवाद का विषय रही है। यह प्लॉट वडोदरा नगर निगम के स्वामित्व में है और यूसुफ पठान के पारिवारिक आवास के पास स्थित है।
सरकार ने नगर निगम को इस जमीन के आवंटन की मंजूरी प्रदान की है। प्रस्ताव के अनुसार, कुल 978 वर्गमीटर में से 500 वर्गमीटर जमीन पठान को निशुल्क मिलेगी।
बाकी 478 वर्गमीटर जमीन वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण की मूल्यांकन समिति द्वारा निर्धारित कीमत के 55 प्रतिशत पर उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह शेष जमीन पर उन्हें निर्धारित मूल्यांकन की तुलना में 45 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
हालांकि अंतिम आवंटन से पहले नगर निगम की स्थायी समिति और सामान्य सभा की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।
जमीन की कीमत करीब 20.53 करोड़ रुपये
वडोदरा नगर निगम ने इस प्लॉट की कीमत 2.10 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित की थी। इस आधार पर पूरी जमीन का अनुमानित मूल्य करीब 20.53 करोड़ रुपये आंका गया है।
इस साल जुलाई में नगर निगम ने जमीन की नीलामी की तैयारी भी की थी। हालांकि कथित अतिक्रमण और कानूनी विवाद के कारण नीलामी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
अब राज्य सरकार के नए फैसले के बाद इस जमीन के आवंटन का रास्ता खुल गया है।
सरकारी प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस विशेष व्यवस्था को भविष्य के अन्य मामलों के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा।
वर्ष 2012 से चल रहा था जमीन का विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। उस समय यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से अपने पारिवारिक आवास के पास स्थित जमीन को 99 साल की लीज पर देने का अनुरोध किया था।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए बिना सार्वजनिक नीलामी के जमीन आवंटित करने की मांग की थी।
उस समय जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 5.6 करोड़ रुपये थी। रिपोर्टों के अनुसार, पठान यह राशि देने के लिए तैयार थे।
नगर निगम ने उनके प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, लेकिन जमीन के आवंटन के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी थी।
वर्ष 2014 में गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।
अतिक्रमण के आरोप में मिला था नोटिस
जमीन आवंटन का प्रस्ताव खारिज होने के बाद भी संबंधित प्लॉट को लेकर विवाद जारी रहा।
वडोदरा नगर निगम ने आरोप लगाया था कि यूसुफ पठान ने जमीन पर बाड़ लगाकर कब्जा कर रखा है।
जून 2024 में नगर निगम ने पठान को कथित अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया था। यह कार्रवाई उनके पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद हुई थी।
इसके खिलाफ पठान ने गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हालांकि अगस्त 2026 में उन्होंने अपनी अपील वापस ले ली। इसके बाद जमीन आवंटन से संबंधित सरकारी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ।
टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए थे पठान
यूसुफ पठान ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर बहरामपुर सीट से जीत दर्ज की थी।
हालांकि जून 2026 में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद उन्होंने टीएमसी से अलग होने का फैसला किया।
14 जून को पठान सहित टीएमसी के 20 बागी सांसद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए थे।
सितंबर में पार्टी ने नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की घोषणा की, जिसमें यूसुफ पठान को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।
उनके राजनीतिक दल बदलने के कुछ महीनों बाद गुजरात सरकार से जमीन आवंटन की मंजूरी मिलने के कारण फैसले के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि दोनों घटनाओं के बीच किसी राजनीतिक समझौते या प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
13 अगस्त को मिली थी सरकारी मंजूरी
रिपोर्टों के मुताबिक, गुजरात सरकार ने 13 अगस्त 2026 को इस जमीन के आवंटन से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
यह आदेश 29 अगस्त को वडोदरा नगर निगम को प्राप्त हुआ। इसके दो दिन बाद 31 अगस्त को पठान ने गुजरात हाई कोर्ट में लंबित अपनी अपील वापस ले ली।
नगर निगम के आयुक्त अरुण महेश बाबू ने पुष्टि की है कि राज्य सरकार से आवंटन की मंजूरी मिल चुकी है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रस्ताव को नगर निगम की स्थायी समिति और सामान्य सभा के समक्ष रखा जाएगा।
नगर निगम को मिलेगी बदले में जमीन
राज्य सरकार ने इस विशेष आवंटन से नगर निगम को होने वाली संपत्ति संबंधी भरपाई की व्यवस्था भी की है।
सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, राजस्व विभाग वडोदरा नगर निगम को समान मूल्य की दूसरी जमीन उपलब्ध कराएगा।
इससे नगर निगम की संपत्ति के मूल्य की भरपाई करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि जमीन पर कथित अतिक्रमण और पूर्व अवधि के संभावित शुल्क का मामला अभी अलग से तय किया जाना बाकी है।
एक स्थानीय नागरिक संगठन ने कथित कब्जे की अवधि के लिए लगभग 7.5 करोड़ रुपये के शुल्क का अनुमान लगाया है। लेकिन यह संगठन का अपना आकलन है, नगर निगम की ओर से निर्धारित आधिकारिक मांग नहीं है।
राजनीतिक फैसले को लेकर उठ रहे सवाल
यूसुफ पठान को करोड़ों रुपये की जमीन का एक हिस्सा निशुल्क देने के फैसले पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इसका प्रमुख कारण उनके राजनीतिक दल में बदलाव और उसके कुछ समय बाद सरकारी मंजूरी मिलना है।
हालांकि सरकारी आदेश में जमीन आवंटन के लिए विशेष व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। अब यह देखना होगा कि नगर निगम की आगामी बैठक में प्रस्ताव पर क्या फैसला होता है।
फिलहाल यूसुफ पठान को 978 वर्गमीटर विवादित प्लॉट के आवंटन की सरकारी मंजूरी मिलना बड़ी राहत है। लेकिन जमीन का अंतिम हस्तांतरण, शेष राशि का भुगतान और पुराने अतिक्रमण विवाद से संबंधित देनदारियां अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई हैं।





